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भारत में कोरोना वायरस से संक्रमण के कुल मामलों की संख्या सात लाख के पार


देश में एक दिन में कोविड-19 के मामलों में बड़ी उछाल आने के बाद सोमवार को भारत में कोरोना वायरस से संक्रमण के कुल मामलों की संख्या सात लाख के पार चली गई. सिर्फ चार दिन पहले देश में संक्रमितों की संख्या छह लाख पहुंची थी.


 


भारत में सोमवार को कोरोना वायरस का पता लगाने के लिए कोविड-19 की जांच की संख्या भी एक करोड़ से अधिक हो गई. केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय ने यह जानकारी दी. केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय की ओर से सोमवार की सुबह जारी किए गए आंकड़ों के अनुसार, एक दिन में कोविड-19 के 24,248 मामले सामने आए जिसके बाद कुल मामलों की संख्या बढ़कर 6,97,413 हो गई.


 


बहरहाल, आंकड़ों के मुताबिक भारत में कोविड-19 के मामले सात लाख 150 है जबकि मृतकों की संख्या 19,795 हो गई है. इन आंकड़ों को संबंधित राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों की तरफ से मुहैया कराए गए आंकड़ों को जोड़कर तैयार किया गया है. मंत्रालय के अनुसार कोविड-19 से 425 और लोगों की मौत होने के बाद इस महामारी से मरने वालों की संख्या 19,693 हो गई है. देश में लगातार चौथे दिन कोरोना वायरस के संक्रमण के बीस हजार से अधिक मामले सामने आए हैं.


 


भारत रविवार को रूस को पीछे छोड़ते हुए कोविड-19 से सर्वाधिक प्रभावित होने वाला तीसरा देश बन गया. संक्रमण के कुल मामलों में अब केवल अमेरिका और ब्राजील ही भारत से आगे है. आंकड़ों के अनुसार, अब तक देश में कोविड-19 के 4,24,432 मरीज उपचार के बाद ठीक हो चुके हैं और 2,53,287 मरीजों का इलाज चल रहा है. मंत्रालय ने बताया कि पिछले 24 घंटे में कोविड-19 के 15,350 मरीज ठीक हुए हैं. मंत्रालय ने कहा, “अब तक 60.86 प्रतिशत मरीज ठीक हो चुके हैं.”


 


कोरोना वायरस के कुल मामलों में वे विदेशी भी शामिल हैं जिनकी भारत में की गई जांच में संक्रमण की पुष्टि हुई. स्वास्थ्य मंत्रालय के मुताबिक पिछले 24 घंटे में तीन लाख 46 हजार 459 नमूनों की जांच हुई है, जिससे कुल जांच की संख्या एक करोड़ एक लाख 35 हजार 525 हो गई है. भारतीय आयुर्विज्ञान अनुसंधान संस्थान (आईसीएमआर) के अनुसार पांच जुलाई तक देश में 99,69,662 नमूनों की जांच की जा चुकी थी. इनमें से 1,80,596 नमूनों की जांच रविवार को की गई.


 


इस बीच बेंगलुरू स्थित वैज्ञानिकों की संस्था इंडियन एकेडमी ऑफ साइंसेज (आईएएससी) ने कहा है कि भारतीय आयुर्विज्ञान अनुसंधान परिषद् (आईसीएमआर) द्वारा 15 अगस्त को कोरोना वायरस का टीका जारी करने का लक्ष्य अव्यावहारिक और हकीकत से परे है. आईएएससी ने कहा कि नि:संदेह इसकी तुरंत जरूरत है, लेकिन मानवीय जरूरत के लिए टीका विकसित करने के लिए चरणबद्ध तरीके से वैज्ञानिक पद्धति से क्लिनिकल परीक्षण की आवश्यकता होती है.


 


इंडियन एकेडमी ऑफ साइंसेज (आईएएससी) ने बयान जारी कर कहा कि प्रशासनिक मंजूरियों में तेजी लाई जा सकती है लेकिन ‘‘प्रयोग की वैज्ञानिक प्रक्रियाओं और डेटा संग्रहण की नैसर्गिक समय अवधि होती है जिस पर वैज्ञानिक मानकों से समझौता नहीं किया जा सकता.’’


 


आईएएससी ने बयान में आईसीएमआर के पत्र का जिक्र किया जिसमें कहा गया है कि ‘‘टीका के सभी क्लीनिकल परीक्षण पूरा होने के बाद इसे अधिकतम 15 अगस्त 2020 तक आम आदमी के स्वास्थ्य के लिए जारी करने पर विचार किया जा सकता है.’’


 


विश्वभर से कोविड-19 पर आंकड़े एकत्रित कर रहे अमेरिका के जॉन्स हॉपकिंस विश्वविद्यालय के अनुसार महामारी से होने वाली मौतों की संख्या के मामले में भारत विश्व में आठवें स्थान पर है.