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प्रदेशभर के अस्पतालों में तैनात लैब टेक्नीशियनों ने बिना अन्न-जल ग्रहण किए ही किया कार्य, हाथ में पोस्टर लेकर किया प्रदर्शन


कोरोनाकाल में वेतन कटौती, संवर्गीय ढाचा व सेवा नियमावली नहीं बनने और एसीपी का लाभ न दिए जाने से नाराज सरकारी अस्पतालों में कार्यरत लैब टेक्नीशियनों ने नए ढंग से विरोध कर अपना आंदोलन आगे बढ़ाया। प्रदेशभर के अस्पतालों में तैनात लैब टेक्नीशियनों ने बिना अन्न-जल ग्रहण किए ही कार्य किया। इस दौरान उन्होंने हाथ में पोस्टर लेकर प्रदर्शन भी किया। 


बता दें, उत्तराखंड मेडिकल लैब टेक्नीशियन एसोसिएशन के बैनर तले तमाम लैब टेक्नीशियन बीते पाच दिन से काली पट्टी बाधकर कार्य कर रहे थे। पर मागों पर कार्रवाई न होते देख उन्होंने अब आंदोलन की रणनीति बदल दी है। एसोसिएशन के प्रदेश महामंत्री मनोज मिश्रा का कहना है कि लैब टेक्नीशियन हर विपरीत परिस्थिति में पूरी निष्ठा से काम करते आए हैं। कोरोनाकाल में भी वह अपने परिवार से दूर रहकर और अपनी जान की परवाह किए बिना दिन-रात ड्यूटी कर रहे हैं।


उन्होंने कहा कि कोरोना संदिग्ध व संक्रमितों की सैंपलिंग का पूरा जिम्मा उन्हीं पर है। पर सरकार उनका मनोबल बढ़ाने के बजाए वेतन कटौती जैसा निर्णय ले रही है। वहीं लैब टेक्नीशियनों की लंबित मागों के प्रति भी सरकार का रवैया उदासीन बना हुआ है। दस वर्ष की सेवा पूर्ण कर चुके लैब टेक्नीशियनों को एमएसीपी का लाभ व वेतन कटौती के आदेश को तत्काल निरस्त करने की माग उन्होंने की। 


इसके अलावा लैब टेक्नीशियनों को जोखिम भत्ता देने व सेवा नियमावली जल्द तैयार करने की भी माग रखी है। कहा कि आइपीएचएस के मानकों के अनुरूप लैब टेक्नीशियन के लगभग एक हजार पद होने चाहिए, पर पिछले दो दशक से लैब टेक्नीशियन का ढांचा ही नहीं बन पाया है और ना ही रिक्त पदों पर नियुक्तिया हुई हैं। वहीं, हजारों प्रशिक्षित बेरोजगार युवा रोजगार की राह देख रहे हैं। कहा कि मागों का समाधान नहीं होने तक लैब टेक्नीशियन बिना अन्न-जल ग्रहण किए कार्य करते रहेंगे।