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लोगों की इस लापरवाही पड़ी इंतजामों पर भारी, अगले हफ्ते फिर लग सकता है लॉकडाउन


उत्तर प्रदेश में जैसे-जैसे कोरोना की जांच बढ़ती जा रही है वैसे-वैसे कोरोना के मामले भी बढ़ते जा रहे हैं. जुलाई के पहले 10 दिनों में ही 10,000 से ज्यादा मामले सामने आ चुके हैं. यही वजह है कि अब प्रदेश सरकार ने पूरे प्रदेश में 55 घंटों का मिनी लॉकडाउन लगाया है. 2 दिनों के इस लॉकडाउन की पूरी रिपोर्ट की सरकार समीक्षा करेगी और आगे हो सकता है कि हफ्ते के आखिर में इसी तरीके का लॉकडाउन फिर देखने को मिले.


लॉकडाउन से मिली मदद


कोरोना संक्रमण के चलते जब लॉकडाउन का ऐलान हुआ तो सड़कें पूरी तरह से सूनी हो गई. हर तरफ सन्नाटा सा पसर गया था. लोग अपने घरों में रहे और इसका फायदा भी हुआ, लेकिन लॉकडाउन के बाद जब अनलॉक की शुरुआत हुई तो लोग ऐसे सड़कों पर उतर आए मानो किसी कैद से आजादी मिली हो. अनलॉक के तहत तमाम नियम जारी किए गए थे, लेकिन बहुत से लोगों को उन नियमों की भी परवाह नहीं रही. यही वजह है कि बाजारों में, सड़कों पर लोग बिना मास्क, सोशल डिस्टेंसिंग के नियमों की अनदेखी करते हुए भी नजर आए. लोगों की यही लापरवाही कहीं ना कहीं कोरोना संक्रमण के फैलाव में मददगार साबित हुई.


यूपी में लगा 55 घंटे का लॉकडाउन


कोरोना के मामले जब बढ़ने लगे तब योगी सरकार ने लॉकडाउन लगाने का बड़ा फैसला किया. 55 घंटे का लॉकडाउन 13 जुलाई सुबह 5 बजे तक जारी रहेगा. आम लोगों की लापरवाही कैसे इंतजामों पर भारी पड़ी इसे आंकड़ों के जरिये समझने की कोशिश करेंगे.


30 जून को पूरे प्रदेश में कोरोना के कुल 23 हजार से ज्यादा मामले थे. 10 जुलाई आते-आते मामले बढ़कर 33700 हो गए. यानी 10 दिन में 10 हजार से ज्यादा केस. 2 जुलाई को प्रदेश में कोरोना के कुल मामले 24,825 थे, जिसमें 6869 एक्टिव केस और 17221 मरीज डिस्चार्ज हो चुके थे और तब पूरे प्रदेश में कुल 735 मौतें हुई थी. वहीं, 5 जुलाई को ये मामले बढ़कर 27,707 हो गए, जिसमे 8161 एक्टिव केस, 18761 डिस्चार्ज और कुल मौतें 785 थी.


वहीं, 7 जुलाई तक मामले बढ़कर 29968 जा पहुंचे और एक्टिव मरीजों की संख्या भी लगातार बढ़ने लगी. 10 जुलाई को कुल मामले 33700 तक जा पहुंचे, जिसमें 11024 एक्टिव केस, और 21,787 डिस्चार्ज जबकि कुल मौतें 889 हो गई थी. इन आंकड़ों ने सरकार की भी चिंता बढ़ा दी और इसीलिए 55 घंटे के लॉकडाउन का ऐलान किया गया. लॉकडाउन के पहले दिन राजधानी लखनऊ समेत प्रदेश के ज्यादातर शहरों में इस पर कड़ाई से अमल होता भी नजर आया.


जांच बढ़ने के साथ ही बढ़े मामले


लगातार मामले बढ़ने के पीछे एक बड़ी वजह ये भी है कि उत्तर प्रदेश में जांच का दायरा भी अब काफी बढ़ गया है. मार्च में जब कोरोना की शुरुआत हुई तो उत्तर प्रदेश में एक भी लैबोरेट्री कोरोना की जांच के लिए नहीं थी. नमूने दिल्ली और एनआईवी पुणे भेजे जाते थे, लेकिन जुलाई आते-आते अब प्रदेश में हर दिन 38000 से ज्यादा जांच हो रही हैं.