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इस साल होली पर बन रहा है यह विशेष योग , इस लिए यह होली का बढ़ गया है महत्व



होली वसंत ऋतु में फाल्गुन पूर्णिमा के दिन मनाया जाने वाला एक महत्वपूर्ण त्योहार है। वस्तुतः यह रंगों का त्योहार है। यह पर्व पारंपरिक रूप से दो दिन मनाया जाता है। पहला दिन होलिका दहन किया जाता है उसके दूसरे दिन रंग खेला जाता है। फाल्गुन मास में मनाए जाने के कारण होली को फाल्गुनी भी कहते हैं। होली का त्योहार भी बुराई पर अच्छाई के प्रतीक के रूप में मनाया जाता है। पौराणिक मान्यताओं के अनुसार इस दिन हिरण्यकश्यप की बहन होलिका जिसे अग्नि से न जलने का वरदान प्राप्त था वह भगवान विष्णु के परम भक्त प्रह्वाद को लेकर अग्नि में बैठ गई थी लेकिन प्रह्वाद को कुछ भी नही हुआ और स्वंय होलिका ही उस अग्नि में भस्म हो गई होलिका दहन के अगले दिन रंग खेले जाते हैं। जिसे रंगवाली या घुलंडी के नाम से भी जाना जाता है।


भद्रा रहित प्रदोष व्यापिनी पूर्णिमा तिथि, होलिका दहन के लिये उत्तम मानी जाती है। परन्तु भद्रा मुख में होलिका दहन कदाचित नहीं करना चाहिये। पूर्णिमा तिथि 28 मार्च को प्रातः 03:27 से प्रारम्भ होकर 28 मार्च को रात्रि 12:17 तक रहेगी। भद्रा 28 मार्च को दिन 1:54 तक रहेगी। 28 मार्च को होली दहन का मुर्हूत सायंकाल 06:21 से रात्रि 08:41 तक करना सर्वोत्तम होगा।


इस साल होली पर कई विशेष योग बन रहे हैं जिससे होली के त्योहार का महत्व और बढ़ गया है. 28 मार्च को होलिका दहन मुहूर्त में चन्द्रमा कन्या राशि में हस्त नक्षत्र में होंगे और वृद्धि योग होगा 29 मार्च रंगवाली होली के दिन ध्रुव योग का निर्माण हो रहा है और इस दिन चंद्रमा कन्या राशि में गोचर करेगा. इसके अलावा दो सबसे बड़े ग्रह शनि और गुरु, मकर राशि में विराजमान होंगे तो वहीं शुक्र और सूर्य ये दोनों ही मीन राशि में रहेंगे. मंगल और राहु वृषभ राशि में, बुध कुंभ राशि और केतु वृश्चिक राशि में विराजमान होगा होली सर्वार्थसिद्धि योग में मनेगी और इसके साथ ही होली पर अमृतसिद्धि योग भी रहेगा.