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नाबार्ड के अधिकारी, कर्मचारी और सेवानिवृत्त स्टाफ़-सदस्य यूएफओ ईरान डेढ़ साल से आंदोलन पर



नाबार्ड के अधिकारी, कर्मचारी और सेवानिवृत्त स्टाफ़-सदस्य यूएफओ ईरान (नाबार्ड के अधिकारियों, कर्मचारियों और सेवानिवृत्त स्टाफ़-सदस्यों का संयुक्त मंच) के बैनर तले करीब डेढ़ साल से आंदोलन पर हैं, लेकिन अब उन्होंने लंबे समय से लंबित पेंशन संबंधी मुद्दों पर गेट प्रदर्शन, काला बैज पहनने, धरने पर बैठने और अंत में 30 मार्च 2021 को पूरे दिन का हड़ताल करने का निर्णय लिया है.

1982 में भारतीय रिज़र्व बैंक के प्रबंधन ने भारतीय रिज़र्व बैंक के कर्मचारियों को नए संगठन (नाबार्ड) में शामिल होने की अपील की और नई संस्था में शामिल होने से संबंधित भय को देखते हुए लिखित में यह आश्वासन दिया था कि जब भी भारतीय रिज़र्व बैंक में कार्य करने वाले उनके सहयोगियों के वेतन, भक्ते और सेवानिवृत्ति लाभों को संशोधित किया जाएगा तब ये सारे भत्ते भारतीय रिज़र्व बैंक से नाबार्ड में आने वाले सारे स्टाफ़-सदस्यों को दिए जाएंगे.


नाबार्ड के स्टाफ़ सदस्य सेवारत और सेवानिवृत्त दोनों सितंबर 2019 से नाबार्ड के अधिकारियों, कर्मचारियों और सेवानिवृत्त स्टाफ़-सदस्यों का संयुक्त मंच (यूएफओईआरएन) के बैनर तले आंदोलन पर हैं. कोविड-19 के कारण आंदोलन में थोड़ा ठहराव होने के बाद, नाबार्ड के कर्मचारी अपने उचित दावों के निपटान में होने वाली देरी के लिए एक बार फिर सड़कों पर उतर आए हैं.


इस बीच, नाबार्ड के छह पूर्व अध्यक्षों/ प्रबंध निदेशकों ने वित्त मंत्री, भारत सरकार को एक संयुक्त पत्र लिखकर यह अपील की है कि नाबार्ड में पेंशन से जुड़े सभी मुद्दों को भारतीय रिज़र्व बैंक की तर्ज पर बिना किसी देरी के निपटाया जाए. यूनाइटेड फोरम ने संयुक्त रूप से और साथ ही अपने अन्य निकायों के माध्यम से वित्त मंत्री, वित्त राज्य मंत्री और डीएफएस के अधिकारियों सहित कई सांसदों, मंत्रियों से अलग-अलग मुलाकात की है और उनसे इन मुद्दों के त्वरित निपटान के लिए अनुरोध लिया है. परंतु हमारी किसी भी अपील पर अभी तक कोई कार्रवाई नहीं की गई है.


स्टाफ-सदस्यों का ऐसा मानना है कि नाबार्ड के प्रबंधन ने भी डीएफएस द्वारा प्रस्तावों को मंजूरी दिलाने में सक्रिय प्रयास नहीं किए हैं. यदि 30 मार्च, 2021 को निर्धारित एक दिवसीय हड़ताल से नाबार्ड के कर्मचारियों के वैध मांगों को पूरा करना संभव नहीं हो पाता है और नाबार्ड प्रबंध तंत्र, डीएफएस और भारत सरकार हमारी मांगों से सहमत नहीं होते हैं तो यूएफओईआरएन दो दिनों की हड़ताल कर सकता और संसद तक मार्च करने के अपने मौजूदा आंदोलन को तेज कर सकता है.