कुशीनगर: त्रिकोणीय लड़ाई में फंसी कुशीनगर की सीट

कुशीनगर: त्रिकोणीय लड़ाई में फंसी कुशीनगर की सीट

कुशीनगर: त्रिकोणीय लड़ाई में फंसी कुशीनगर की सीट


 


जनपद लोकसभा के चुनाव में कुशीनगर सीट पर पार्टियों के द्वारा जिस तरह से प्रत्यासियों में अदला बदली का खेल खेल कर जिताऊ प्रत्यासि को मैदान में उतारा गया है वहीं कतिपय प्रत्याशी जातिगत आधार पर फसते नजर आ रहे है।


उल्लेखनीय है की मूल समस्सयाओं दूर हो चुकी देश की राजनीति अब जातिगत आधार बनकर पंगू बनकर रहगई है और पार्टियों के एजेन्डे में विकाश का मुद्दा ही स्वपन बनकर रहगया है और नाही कोई पार्टी विकाश को अपना मुद्दा बनाना चाहती है
बताते चले कि नेताओं के इस खेल में मतदाता जातिगत आधार पर मतदान करता मतदाता अपने ठगे जाने के बाद अब जातीय तिलस्म तोड़ता दिखाई देरहा है प्रत्यासी या पार्टी के जातिगत आधार को नकार कर मतदाता विकाश के मुद्दे को अपना एजेंडा बनाये हुए है चुनाव में वादे और इरादे तो रोज किये जाते है और रंगीन सपने भी खूब दिखाए जाते है परन्तु चुनाव गया बात गई अपनी कही गयी बात पर कतिपय लोग ही खरे उतरते है इसलिए इन नेताओं के झूठे वादे और रंगीन सपने से धोखा खा चुकी जनता अब सिर्फ विकाश के मुद्दे को ही एजेंडा बनाये हुए है एक नजरिये से देखा जाय तो कुशीनगर लोकसभा क्षेत्र में जातिगत आधार पर मुुस्लिम चारलाख 50 हजार,अनुसूचित तीन लाख 80 हजार, ब्राह्मण दो लाख 70 हजार कुशवाहा दोलाख 20 हजार ,यादव एकलाख 70 हजार,कुर्मी सैंथवार एकलाख 75 हजार ,राजपूत 50 हजार भुइंहार 18 हजार,चौहान 70 हजार की आबादी वाला लोकसभा वाला क्षेत्र है परन्तु प्रत्यसियों एवं पार्टियों की जतिगत बिसात एवं मतदाताओं का एजेंडा बना विकाश का मुद्दा क्या गुल खिलाये गा यह आने वाला समय बतायेगा परन्तु इतना तो जरूर है कि मतदाताओं की चुप्पी ने इन नेताओं की नींद उड़ा रख्खा है।


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