राहुल गांधी एक साल तक नहीं रहेंगे कांग्रेस के अध्यक्ष, इन चार नामों पर हो सकता है विचार

राहुल गांधी एक साल तक नहीं रहेंगे कांग्रेस के अध्यक्ष, इन चार नामों पर हो सकता है विचार


लोकसभा चुनाव में मिली हार के बाद राहुल गांधी ने 25 मई को बुलाई गई कांग्रेस कार्यसमिति के सामने हार की जिम्मेदारी लेते हुए कांग्रेस के अध्यक्ष पद से इस्तीफे की पेशकश कर दी। हालांकि इस बैठक में ही CWC के सभी सदस्यों ने सर्वसम्मति से राहुल गांधी के इस्तीफे को नामंज़ूर कर दिया । इसके बाद भी राहुल अपने फैसले पर कायम रहे, साथ ही राहुल ने नया अध्यक्ष चुनने के लिए पार्टी के बड़े नेताओं को अगले एक महीने का समय दिया है।इस्तीफे की पेशकश के बाद से ही राहुल गांधी को मनाने की हर कोशिश नाकाम रही कांग्रेस के कई बड़े नेताओं ने राहुल को सलाह दी कि वो संकट की इस घड़ी में पार्टी का नेतृत्व करते रहें. इस बीच राहुल लगातार नेताओं को कहते रहे कि वो अगले अध्यक्ष को चुनने की प्रक्रिया शुरू कर दें. साथ ही राहुल ने ये भी संकेत दिया कि वो पार्टी अध्यक्ष रहे बगैर भी पार्टी के लिए काम करते रहेंगे. लेकिन आज CWC बैठक के लगभग एक महीने बाद भी असमंजस की स्थिति बरकरार है।


एक-डेढ़ साल तक अध्यक्ष पद से दूर रहेंगे राहुल


सूत्रों के मुताबिक राहुल अगले एक से डेढ़ साल तक कांग्रेस अध्यक्ष पद से दूर रहेंगे, बताया जा रहा कि कांग्रेस के बड़े नेताओं ने ही ये बीच का रास्ता राहुल गांधी के लिए निकाला है. इस दौरान राहुल गांधी बिना किसी पद के देशभर में कांग्रेस के कार्यकर्ताओं से सीधा संवाद करेंगे. वही नए कांग्रेस अध्यक्ष के चुनाव को लेकर जल्द ही कांग्रेस कार्यसमिति की बैठक जल्द बुलाई जा सकती है.


इन नामों पर हो सकता है विचार


सूत्रों के हवाले से गांधी परिवार के करीबी दो बड़े नेता अहमद पटेल और गुलाम नबी आज़ाद को नए अध्यक्ष को तलाशने की जिम्मेदारी दी गई है. जिस बाबत इन दोनों नेताओं ने दक्षिण भारत के कुछ बड़े नेताओं से संपर्क साधा, लेकिन कहा ये जा रहा है कि कोई भी नेता राहुल के रहते हुए अध्यक्ष बनने को तैयार नहीं हो रहा है. ऐसे में खबर है कि हिंदी पट्टी से किसी बड़े नेता को कांग्रेस अध्यक्ष बनाया जा सकता है. पिछली लोकसभा में कांग्रेस के नेता मल्लिकार्जुन खड़गे, सुशील कुमार शिन्दे, मीरा कुमार, अशोक गहलोत सहित कुछ नेताओं के नाम पर विचार हो रहा है.


अगले एक साल तक क्या करेंगे राहुल गांधी


राहुल के जिद के आगे झुके कांग्रेस नेताओं ने ये बीच का रास्ता निकाला है, जिसमें राहुल गांधी की बात भी रह जाए और कांग्रेस का अध्यक्ष पद भी खाली न रहे. राहुल बिना किसी जवाबदेही के देशभर में घूमकर कांग्रेस कार्यकर्ताओं से मिलकर संवाद कर सकते हैं. वह बिना पद के मोदी सरकार की गलत नीतियों के खिलाफ खुल कर आलोचना कर पायेंगे. पद नहीं रहने पर सत्ता पक्ष के निशाने पर कांग्रेस अध्यक्ष होंगे न कि राहुल गांधी. इस प्रयोग के साथ राहुल गांधी उन राज्यों के ज्यादा समय दे सकेंगे जहां कांग्रेस जमीन पर खत्म हो चुकी है.


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