कुशीनगर/खड्डा: सफाईकर्मी व ग्राम प्रधान की लापरवाही से कई सालों से नहीं साफ हुई है नालियां

कुशीनगर/खड्डा: सफाईकर्मी व ग्राम प्रधान की लापरवाही से कई सालों से नहीं साफ हुई है नालियां


कुशीनगर: जनपद कुशीनगर के गांवों में साफ-सफाई के लिए भले ही सफाई कर्मी तैनात किए गए हैं, लेकिन गांवों की स्थिति देखकर ऐसा लगता है नालियों की सफाई हुए एक जमाना हो गया है। सरकार सफाई कर्मियों को मोटी तनख्वाह तो देती है, लेकिन काम का कोई हिसाब नहीं लेती है। ऐसे में सफाई कर्मी अपनी ड्यूटी ईमानदारी से नहीं करते हैं। कई-कई दिन गांवों में सफाई करने के लिए नहीं जाते हैं। इससे गांवों में गंदगी फैली है। बारिश में गंदगी से संक्रामक बीमारियां फैलने का खतरा भी बढ़ गया है।


स्वच्छ भारत अभियान के तहत गांवों को साफ सुथरा बनाए रखने के लिए विशेष जोर दिया जा रहा है, लेकिन सफाई कर्मियों की मनमानी के चलते तमाम कोशिशें नाकाम हो रही हैं। गांवों में सफाई व्यवस्था का बुरा हाल है। नालियों में गन्दा पानी जमा हो रहा है। गंदगी की वजह से खतरनाक बीमारियां फैल रही हैं। बड़ी ग्राम पंचायतों में कई कई सफाई कर्मी नियुक्त हैं, लेकिन सफाई कर्मी गांवों में सफाई करने के बजाए नेताओं व अफसरों के घर काम कर रहे हैं। जिला प्रशासन की सुस्ती के चलते सफाई कर्मियों के हौसले बुलंद हैं।


कुछ ऎसा ही मामला कुशीनगर जनपद के खड्डा ब्लाक अंतर्गत ग्राम सभा मदनपुर सुकरौली में
 बनी नाली का है।  खड्डा ब्लाक क्षेत्र के ग्राम सभा मदनपुर सुकरौली में पिछले कई माह से सफाई कर्मी नहीं पहुंचा है। गांव में जगह जगह गंदगी के ढेर लग गए हैं। मजबूरी में ग्रामीण अपने हाथ से नालियों की सफाई कर रहे हैं। ऐसे में ग्रामवासियों में गुस्सा है।  गांवों में सफाई नहीं होने की वजह से ग्रामीणों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। कुछ ग्रामीण अपने घर के सामने नाली व कचड़ा साफ कर रहे थे तब हमारे संवाददाता ने पूछ -ताछ की तब ग्रामीणो ने बताया कि सिर्फ वोट मांगने आती है राजनीतिक पार्टियां व प्रधान। कई बार ग्राम प्रधान से  शिकायत करने के बाद भी कोई कार्रवाई नहीं की जा रही है। 


विभागीय अधिकारी तो कहते है, गांवों में गंदगी किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं की जाएगी और  जिस गांव में गंदगी या नालियों की सफाई नहीं मिली तो नियुक्त सफाई कर्मी के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। गांवों को साफ सुथरा बनाना पहली प्राथमिकता है। लेकिन ये सब मुंह से कहने की बात है।धरातल पर कुछ भी नहीं।


दिलीप मोदनवाल की रिपोर्ट


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