प्राइबेट डाक्टरों के भरोसे चल रहा पशु चिकित्सालय

प्राइबेट डाक्टरों के भरोसे चल रहा पशु चिकित्सालय


जौनपुर: जनपद के पशु चिकित्सालय राम भरोसे चल रहा है। जलालपुर बिकास खंड अंतरगत चौरी में बने पशु केन्द्र पर तैनात डाo एस पी यादव जोकि निजी चिकित्सक रबिंद्र यादव के साथ ही दिखते नजर आते हैं। यही नहीं पशुपालकों से जरुरत से ज्यादा धन उगाही करते हैं। पशुपालकों से मिली जानकारी के अनुसार अगर कोई जानवर का बच्चा पैदा होते समय किसी कारण वस दिक्कत में आ जाता है और पशुपालक आनन फानन में इन्हे बुलाकर अपने पशु को दिखाता है तो पशुपालक को कम से कम 3500 से 4000 हजार का भुगतान करना ही पड़ेगा। कई बार इनकी शिकायत भी हुई लेकिन बिभागी लापरवाही या मिलीभगत से इनका कुछ भी नहीं होता। यही हाल करीब ज़िले के हर केंद्र पर देखने को मिलता है।सरकोनी बिकास खंड में भी रिटायर्ड हुए एन सिंह वाराणसी से चले आते हैं लेकिन बिभाग द्वारा टीकाकरण अभियान में कभी शामिल नहीं होते न ही बिभाग से इनको कोई नोटिस नहीं दी जाती। यहां का यह हाल है कि डा एन सिंह के रिटायर्ड हुए करीब 5या6 साल हो गए तब तक यहां चिकित्सकों की कोई भरमार नहीं थी लेकिन आज के समय में इस ब्लाक में बिना अनुभव कई चिकित्सक झोला लेकर घूम रहे हैं।जो बिभाग से जुड़कर ट्रेनिंग लिए है।उनसे कोई भी कार्य नहीं लिया जाता कारण उन्हें बिभाग के डाक्टर व एलीओ सिर्फ अपने जरूरत पर याद करते हैं बाकी दिनों में उनसे कोई भी मतलब या तबज्जो नही देते।उसका सबसे बड़ा कारण धन उगाही है। पशुपालकों द्वारा बुलाने पर अगर किसी कारण से सरकारी डॉक्टर एलीओ नहीं आ पाते हैं तो ए लोग अपने बिभाग द्वारा ट्रेनिंग लिए हुए पशुमित्र का सहारा ना लेकर निजी चिकित्सक को भेजते हैं पशुपालक चिन्तित भी रहते हैं। अगर बिभाग चाहे तो हर एक केंद्र पर एक पशुमित्र को एलीओ के साथ सामंजस्य स्थापित कराकर कार्य करा सकती है। इससे पशुमित्रो पर अधिकारीक सौहार्द बनाकर पशुपालकों के जेब को निचोड़ने से बचाया जा सकता है।कुछ ऐसे केन्द्र है कि जिसपर आज तक एलीओ को वहां के लोग देखे भी नहीं होंगे। जनता इस माहामारी में त्रस्त है और पशुपालन विभाग सहयोग से काफी दूर है। बिभाग खुद जब अपना खुद का नाम नहीं लिख पाने वाले को डाक्टर बनाकर क्षेत्र में घूमा रही है। अगर इस पर सुनवाई व ध्यान नहीं दिया गया तो आला अधिकारियों से भी इसकी जानकारी ली जाएगी।


शेखर श्रीवास्तव पत्रकार जौनपुर


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