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लगातार मौसम की बेवफाई तथा कोरोना महामारी के कारण पहले से ही आर्थिक चोट खाया किसान आलू बुआई के समय बीज की महंगाई को लेकर खासा परेशान

लगातार मौसम की बेवफाई तथा कोरोना महामारी के कारण पहले से ही आर्थिक चोट खाया किसान आलू बुआई के समय बीज की महंगाई को लेकर खासा परेशान है।माल इलाके में बीते तमाम सालों सेआलू का बहुल उत्पादन करते आये किसान इस बार सिर चढ़ कर बोल रही बीज की महंगाई से बुआई का दायरा कम करने अथवा दूसरी फसल बोने को विवश हो रहे हैं।विकास खण्ड माल के एक बड़े भू भाग में अरसे से आलू का बहुल उत्पादन होता आया है। थोड़े फैसले पर बने हुए दो कोल्ड स्टोर इस बात की ताईद कर रहे हैं।इसके अतिरिक्त इलाके के कई साप्ताहिक बड़े बाजार आलू की मांग करते देखे जा सकते हैं।इसके बावजूद हर साल अक्टूबर माह में बुआई करने वाले आलू उत्पादक इस बार खासे परेशान हैं।


आलू की कीमतें आसमान छू रही हैं।बीते सालों मेंअधिकतम दस पन्द्रह रुपये किलो बिकने वाला आलू सब्जी के लिए इस साल चालीस रुपये किलो से भी अधिक दाम में बिक रहा हैं। चिप्सोना,कुफरी चन्द्र मुखी,कुफरी बादशाह तथा कुफरी लालिमा आदि प्रजाति का अच्छी क्वालिटी का बीज इससे काफी ज्यादा महंगा है।


एक बीघा आलू बोने के लिए कम से कम चार कुन्तल आलू बीज की जरूरत होती हैखाद ,जुताई,बुआई,सिंचाई तथा मजदूरी आदि का व्यय अतिरिक्त है।इतना खर्च करने के बादआने वाले समय मे आलू का रेट क्या होगा? यह भविष्य के पेट में है।किसान की आर्थिक हालत पहले से ही दयनीय है।मौसम की मार से किसान गिर कर संभल भी नहीं पाया था कि कोरोना महामारी ने उसकी फसलों को मुनाफे की जगह तक बिकने के लिए समय से पहुंचने नहीं दिया।अब इतना महंगा बीज खरीद पाना किसान के बस के बाहर की बात हो चुकी है।आलू के बहुल उत्पादक विनोद शुक्ल का कहना है कि बीज महंगा होने के कारण इस साल दो चार बीघा आलू बो पाना मध्यमवर्गीय किसान के लिए असम्भव है।यदि किसान कर्ज लेकर आलू की खेती कर ले,तो भविष्य में रेट क्या होगा,यह अनिश्चित है।


अजय प्रताप सिंह का मानना है कि किसानों को महंगा आलू लेकर बोना अपने पाव पर कुल्हाड़ी मारने जैसा है।क्योंकि जब जब बीज महंगा हुआ है।तब उसकी फसल सस्ती रही है।इसी उहापोह में किसान अपने भविष्य को लेकर चिंतित है।