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केमिस्ट एंड ड्रगिस्ट एसोसिएशन द्वारा प्रदेश स्तरीय पदाधिकारियों का किया गया सम्मान समारोह


बलरामपुर। केमिस्ट एंड ड्रगिस्ट एसोसिएशन द्वारा प्रदेश स्तरीय पदाधिकारियों के आगमन पर सम्मान समारोह तथा शैक्षणिक कार्यक्रम का आयोजन सूर्या होटल में किया गया। समारोह में प्रदेश महामंत्री व प्रदेश के संयुक्त मंत्री सहित जिला स्तरीय तमाम पदाधिकारियों ने प्रतिभाग किया। बता दे कि केमिस्ट एंड ड्रगिस्ट एसोसिएशन की बलरामपुर इकाई द्वारा जोनल सचिव अजय श्रीवास्तव के नेतृत्व में स्वागत सम्मान समारोह तथा शैक्षणिक कार्यक्रम का आयोजन रविवार को सूर्या होटल में किया गया। कार्यक्रम में बतौर मुख्य अतिथि यूडीएफयूपी के प्रदेश महामंत्री सुरेश गुप्ता व संगठन मंत्री राकेश सिंह मौजूद थे। कार्यक्रम में सीडीएफयूपी के जिलाध्यक्ष रघुनाथ अग्रवाल, महामंत्री अंबरीश तिवारी, कोषाध्यक्ष शमशुल हुदा सहित जिला व तहसील स्तरीय व तमाम पदाधिकारी सदस्य तथा मेडिकल संचालक मौजूद रहे। मुख्य अतिथि प्रदेश महामंत्री सुरेश गुप्ता ने मेडिकल संचालकों के प्रमुख समस्याओं पर प्रकाश डालते हुए केंद्र तथा राज्य सरकारों को सीधे तौर पर दोषी ठहराया। उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार की गलत नीतियों के कारण एक ओर जहां आम जनता को दवाएं महंगी रेट में मिल रही हैं, वहीं मेडिकल संचालकों तथा दवा का धंधा करने वाले लोगों के लिए भी समस्याएं उत्पन्न हो रही हैं। आम जनता के निगाह में मेडिकल संचालक दवाओं के मूल्य में हेराफेरी करते हैं, जबकि यह जिम्मेदारी केंद्र सरकार के प्राइज निर्धारण विभाग एनपीपीए का है। उन्होंने साफ शब्दों में कहा कि एक ही दवा का अलग-अलग कंपनियों के अलग-अलग मूल्य निर्धारित करने की इजाजत केन्द्र सरकार दे रही है। उन्होंने कहा कि जिस दवा का मूल्य कुछ कंपनियों को 100 रुपये निर्धारित करने का अधिकार दिया गया है


उसी दवा का मूल्य कुछ कंपनियों को मात्र 20 से 25 रुपये निर्धारित करने का अधिकार दिया गया है। इतनी बड़ी विसंगति आम जनता के लिए एक बड़े बोझ के रूप में उत्पन्न हो रही है। उन्होंने मांग किया कि केंद्र सरकार मूल्य निर्धारण नियम को पारदर्शी तथा एक समान बनाए। सभी कंपनियों के लिए एक तरह का मूल्य निर्धारण हो। दूसरी मांग उन्होंने उठाई कि 1948 से चला आ रहा मेडिकल लाइसेंस का कानून बदला जाए। मेडिकल स्टोर चला रहे संचालकों को फार्मासिस्ट की डिग्री ना होने की दशा में अलग से कोई प्रशिक्षण देकर संचालन की इजाजत दी जाए। उन्होंने कहा कि पूरे देश में 6:30 लाख से अधिक मेडिकल स्टोर हैं जबकि 4:30 लाख से अधिक फार्मासिस्ट के बगैर संचालित हो रहे हैं। उन्होंने केंद्र तथा प्रदेश सरकार से सवाल किया कि यदि इतनी संख्या में फार्मासिस्ट नहीं थे तो फिर मेडिकल का लाइसेंस इतनी बड़ी संख्या में क्यों दिया गया। इसके लिए सीधे तौर पर सरकार जिम्मेदार है। उन्होंने कहा कि इसमें बीच का रास्ता निकालने की जरूरत है। तीसरी महत्वपूर्ण मांग उन्होंने सरकार से रखी की सभी व्यापारियों का इनकम टैक्स का सेल टैक्स अलग-अलग रिटर्न फाइल करने के बजाय एक ही जगह फाइल रिटर्न करने की व्यवस्था बनाई जाए, जिससे कि व्यापारियों को दो जगह दो अधिवक्ता को रखकर अनावश्यक आर्थिक बोझ ना पड़े। उन्होंने प्रदेश सरकार को चेतावनी भी दी कि यदि उनकी मांगों को 30 दिसंबर तक नहीं माना गया तो जनवरी में निर्णय लेकर एक दिन के लिए पूरे प्रदेश के मेडिकल स्टोर बंद रखे जाएंगे। उन्होंने केंद्र सरकार की नीतियों पर सवाल उठाते हुए कहा कि जब बगैर फार्मासिस्ट डिग्री के मेडिकल स्टोर चलाने की इजाजत नहीं हैै, तो फिर ऑनलाइन दवाओं को मंगाने का अधिकार किस अधिनियम के तहत दिया जा रहा है । उन्होंने ऑनलाइन दवा बिक्री पर विरोध दर्ज कराते हुए कहा कि इसे तत्काल प्रभाव से बंद किया जाना चाहिए । केंद्र सरकार दोहरे मापदंड दवा व्यवसायियों के साथ अपना रही हैं । दवा निर्माता कंपनियां अपने अपने हिसाब से एक ही दवा की अलग-अलग मूल्य निर्धारित करने का अधिकार कैसे रख सकती हैंं। केंद्र सरकार को इस विसंगति को तत्काल दूर करना चाहिए।