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सड़क को गड्ढा मुक्त करने के नाम पर हो रही खानापूर्ति, मौके से विभागीय जिम्मेदारों के नदारद रहने से भ्रष्टाचार को लग रहा है पंख


जमुनहा-श्रावस्ती। जनपद की तमाम गड्ढा युक्त सड़को के जख्म भरने के लिए प्रदेश के मुखिया योगी आदित्यनाथ ने अंतिम तारीख 15 जून तय की थी। मुख्यमंत्री का सीधा आदेश होने से मुख्यमार्ग से लेकर शहर और गांवों को जोड़ने वाले मार्गों को गड्ढा मुक्त कराने की आपाधापी मच गयी थी। शासन के कोप से बचने के लिए अधिकारियों ने आनन फानन में सड़कों के गड्ढों पर लीपापोती कर कागजो में ऑल इज वेल कर लिया है। लेकिन मार्ग के जख्म पर अधूरे मरहम से यह घाव अब और गहरे हो गए हैं। इन घावों को जमुनहा-बहराइच, भिनगा-लक्ष्मनपुर, मिर्ज़ापुर-कटिलिया, मिर्ज़ापुर-मनवरिया समेत जिले के विभिन्न मार्गों पर देखा जा सकता है।


जिसपर चलना लोगो का दूभर हो गया है। हालांकि क्षेत्र के समाज सेवियों की मांग पर जिलाधिकारी के निर्देश पर इन मार्ग पर बने गड्डो को भरने के लिए पीडब्ल्यूडी विभाग ने कार्य शुरू कर दिया है। मिर्ज़ापुर-मनवरिया दीवान मार्ग पर हो रहे कार्यो में लीपापोती चल रही है। जिसपर अभी से यह सवाल उठने लगे हैं कि गड्ढे कितने दिन बंद रहेंगे। गड्ढा बंद कराने में मानक और गुणवत्ता की भी धज्जियां उड़ाई जा रही है। पीडब्ल्यूडी विभाग के कर्मचारी भी प्रशासन के कोपभजन से बचने के लिए गुणवत्ता के बजाय सारा ध्यान गड्ढे को बंद करने पर केन्द्रित किए हुए हैं। जिसकी वजह से गड्ढा मुक्त करने के नाम पर सिर्फ खानापूर्ति की जा रही है। गुणवत्ता पर कोई ध्यान नहीं दिया जा रहा है। इस सम्बंध में मौजूद श्रमिको से वार्ता की गई तो उनका कहना था कि मौके पर जेई साहब नही है जैसा उनका निर्देश मिला है वैसे ही कार्य किया जा रहा है। इससे कस्बे के लोगों का कहना है कि जिस तरह से गड्ढा बंद करने के नाम पर खानापूर्ति की जा रही है उससे साफ है कि अधिक दिनों तक गड्ढा बंद नहीं रहेगा। हकीकत तो यह है कि डामरीकृत सड़कों के गड्ढा भरने के लिए गिट्टी और डामर मिश्रण की मशीनें तक नहीं है और मौके से जिम्मेदार कर्मचारी भी नदारद हैं। ऐसे मार्ग का अब तो ईश्वर ही मालिक है। जहाँ पर सड़को के जख्म भरने के लिए लीपापोती कर अधिकारी लाखो डकारने में जुटे हुए है।