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शीत लहरी व ठण्ड से बचने के लिए जारी किया गया एडवाइजरी, एडीएम ने सभी नगर निकाय में रैन बसेरे का सुचारु रूप से संचालन कराने का दिया निर्देश



बलरामपुर। जिले में शीतलहर को देखते हुए जिला आपदा प्रबंधन प्राधिकरण द्वारा शीतलहर से बचाव हेतु एडवाइजरी जारी की गई है। अपर जिलाधिकारी अरूण कुमार शुक्ल ने बताया कि शीतलहरी को देखते हुए जिले भर में सात रैन बसेरे स्थापित किए गए हैं। कोई भी निराश्रित व्यक्ति रात्रि में खुले में ना सोए यह नगरीय क्षेत्र में अधिशासी अधिकारी सुनिश्चित करेंगे। अपर जिलाधिकारी ने बताया कि शुक्रवार को जिले भर में 55 स्थानों पर अलाव की व्यवस्था की गई है। इसकी संख्या लगातार बढ़ाई जा रही है। जिले में स्थापित तीनों चीनी मिलों को निर्देश दिए गए हैं कि वह गन्ना ढोने वाली बैलगाड़ियों व ट्रैक्टर ट्रालियों में रेडियम पट्टी लगवाएं। साथ ही तौल केन्द्रों पर रैनबसेरा/शेल्टर की स्थापना करें व वहां अलाव की भी व्यवस्था की जाए। जिला आपदा प्रबंधन सलाहकार सचिन मदान ने बताया कि फावड़े, कुदालें, जलावन की लकड़ियां और पर्याप्त गर्म कपड़ों के साथ आपातकालीन किट तैयार रखें। घर के अंदर सुरक्षित रहें तथा स्थानीय समाचार पत्र, रेडियो व टेलीविजन से मौसम की जानकारी लेते रहें।

 शीतदंश के लक्षणों को पहचानें- जैसे हाथों व पैरों की उंगलियों, कानों, नाक आदि पर सफेद या पीले दाग उभर आना। शीतदंश की स्थिति में शीघ्र अपने निकटतम स्वास्थ्य केन्द्र जाकर इलाज कराएं। कोयले की अंगीठी/मिट्टी तेल का चूल्हा/हीटर आदि का प्रयोग करते समय सावधान रहें व कमरे को हवादार रखें, ताकि जहरीले धुएं से नुकसान न हो। विषम परिस्थितियों अथवा अत्यधिक सर्दियों के लिए ईंधन बचाकर रखें। शरीर को सूखा रखें, गीले कपड़े तुरंत बदल लें, ये आपके शरीर को नुकसान पहुंचा सकते हैं। अपने परिवार को यथासंभव घर के अंदर सुरक्षित रखें। घर में अलाव के साधन नहीं हैं, तो अत्यधिक ठंड के दिनों में सामुदायिक केन्द्रों/स्थलों पर जाएं, जहां प्रशासन द्वारा अलाव का प्रबंध किया गया हो। कई स्तरों वाले गर्म कपड़े आपको शीतदंश और हाइपोथर्मिया से बचा सकते हैं। मवेशियों को रात में खुले आकाश, पेड़ के नीचे न रखें तथा मवेशियों को छत के नीचे रखकर कम्बल/सूती बोरा से ढकें। रात में आग जलाएं एवं उनके बैठने की जगह पर पुआल/रबर मैट का इस्तेमाल करें। शीतलहरी के दौरान वाहन चलाते समय हेलमेट, हाथ में दस्ताना और फुल जैकेट जरूर पहनें। घने कुहासे में गाड़ी न चलाएं, अति आवश्यक होने पर फाॅग लाइट जलाकर धीमी गति से सावधानी पूर्वक गाड़ी चलाएं। शरीर में ऊष्मा के प्रवाह को बनाए रखने के लिए पौष्टिक आहार एवं गर्म पदार्थों का सेवन करें। अत्यधिक कम्पन्न, सुस्ती, कमजोरी, सांस लेने में परेशानी हो तो तत्काल स्थानीय चिकित्सक से परामर्श लें।