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चंडीगढ़ में एसआइटी को एक पीड़ित परिवार मिला, पति की मौत के बाद बेटे के साथ पंजाब गई पीड़िता वापस नहीं आई



ब्यूरो कार्यालय (कानपुर):कानपुर में सिख विरोधी दंगों के दौरान दर्ज मामलों की जांच के लिए पंजाब पहुंची एसआइटी को चंडीगढ़ में केवल एक ही पीड़ित परिवार मिला है। ये परिवार अर्मापुर के ओएफसी गेट पर मारे गए कर्मचारी मोहन सिंह का है। अन्य तीन परिवारों के बारे में वहां के लोगों को भी जानकारी नहीं है। 

36 साल पहले पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी की हत्या के बाद कानपुर के अर्मापुर समर्थित ओएफबी के वापसी गेट पर तीन कर्मचारियों मोहन सिंह, कुलवंत सिंह, आर.एस अरोड़ा की बेरहमी से हत्या कर दी गई थी। इसके साथ ही अर्मापुर एस्टेट में भी एक कर्मचारी वजीर सिंह और उनके बेटे सिम्मी की हत्या कर दी गई थी।

रविवार को चंडीगढ़ पहुंची टीम ने दिवंगत मोहन सिंह की पत्नी अरिंदर कौर और बेटे हरेंद्र सिंह से मुलाकात की। बाकी किसी भी मृतक के पीड़ित परिजन नहीं मिले। 

मोहन सिंह की पत्नी ने एसआइटी को बताया कि घटना एक नवंबर 1984 की है। उस समय वह बेटे के साथ किदवईनगर स्थित अपने घर पर मौजूद थीं। दोपहर बाद उन्हें पति और अन्य कर्मचारियों के हत्या की खबर मिली। पति की हत्या के कुछ दिन बाद वह बेटे को लेकर पंजाब चली आई। पंजाब में उनके बेटे की मृतक आश्रित में नौकरी लग गई थी। उसके बाद वह दोबारा कानपुर नहीं गईं।