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सांसद की संस्तुति भी नहीं करवा सकी दो दशक से जमे ग्रा0पं0अ0 व प्रभारी एडीओ का स्थानान्तरण

 


धौरहरा खीरी:विकास खंड धौरहरा में ग्राम पंचायत अधिकारी राजेश वर्मा एक लंबे अरसे जिसकी अवधि करीब 20 वर्ष के आस पास की बताई जाती है विकास खंड में जमें हुए हैं। सांसद की संस्तुति भी इनका स्थानान्तरण नही करवा पायी। जिस कारण धीरे धीरे करके स्थानीय राजनीति में इनका अच्छा खासा दखल बताया जाता है। विकास खंड में इनके दबदबे का अंदाजा सिर्फ इसी से लगाया जा सकता है कि ब्लाक की बड़ी बड़ी 9 ग्राम पंचायतें इनके कब्जे में हैं साथ ही विकास खंड में.एक महत्वपूर्ण पद एडीओ पंचायत का भी हथिया रखा है। जिससे इनके द्वारा कराए गए विकास कार्यों की गुणवत्ता विकास खंड में हो रहे कार्यों की एक अलग ही पहचान है। इनकी पंचायतों में हो रहे कार्यों व पंचायत भवन के निर्माण में घटिया सामग्री का उपयोग करके गुणवत्ता विहीन कार्य से लाखों की हेरा-फेरी कर अवैध कमाई की जा रही है। 

 बताया जाता है कि विकास खंड धौरहरा में लगभग बीस वर्ष से तैनात ग्राम पंचायत अधिकारी राजेश वर्मा कार्यरत हैं और दबंगई से विकास खंड में भ्रष्टाचार को बढ़ावा दे रहे हैं। इनकी पहुंच का अंदाजा सिर्फ इसी से लगाया जा सकता है कि भ्रष्टाचार की शिकायतों का संज्ञान लेते हुए सांसद अजय मिश्र ने इनके स्थानान्तरण करने की संस्तुति जिलाधिकारी को 27.06.2019 को की परन्तु शायद सांसद की इस संस्तुति को भी रद्दी की टोकरी के हवाले कर दिया। मालूम हो कि पूर्व में उच्च अधिकारियों ने 2018 इनका स्थानांतरण विकास खंड बांकेगंज कर दिया था लेकिन सांठगांठ और अपनी पहुंच के चलते बांकेगंज में इन्होंने ज्वाइन ही नहीं किया और स्थानांतरण भी निरस्त करा लिया। इनके स्थानांतरण का निरस्त होना भी क्षेत्र में एक चर्चा का विषय बना हुआ तो था ही सांसद की सिफारिश के बाद भी इनका स्थानान्तरण न होना उससे भी अधिक चर्चा का विषय बन गया। शिकायतों व सांसद की संस्तुति के बाद भी इनका स्थानान्तरण न होकर यहीं जमे रहना इस ओर इंगित करता है कि इनके ऊपर उच्च अधिकारियों की छत्रछाया है या इनकी पहुंच के आगे सांसद अधिकारी सब बौने हैं। बताते हैं कि नवंबर माह में खीरी जिले के ईमानदार कहे जाने वाले मुख्य विकास अधिकारी अरविंद कुमार सिंह ने खबर का संज्ञान लिया था और स्थानांतरण होने की बात कही थी। लेकिन धीरे-धीरे एक महीना से अधिक का समय गुजर जाने के बाद भी शायद वह भी इनका स्थानांतरण न कर सके। शायद सीडीओ भी इनकी पहुंच के आगे छोटे पड़ गए जबकि सीडीओ ने पत्रकार द्वारा इन राजेश वर्मा के बारे में पूंछे जाने पर बताया था कि यहां से लेटर जारी हो गया है कि 5 वर्षों से अधिक समय से एक जगह पर जमे हुए कर्मचारी है उनका स्थानान्तरण होना ही होना है। 

  यह कोई पहला मामला नहीं है कि अधीनस्थ सीडीओ पर भारी पडे़ हो ऐसे मामले में अधीनस्थ सीडीओ व डीपीआरओ के आदेशों की धज्जियां उड़ाकर इनके आदेशों को ठेंगा दिखा रहे हैं ।

डीएम खीरी के सीयूजी नंबर पर वार्ता करने का प्रयास किया गया बताया गया साहब मीटिंग में है ।