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निजीकरण को लेकर बैंक कर्मचारी दूसरे दिन भी रहे हड़ताल पर, जगह जगह हुआ प्रर्दशन

 


निजीकरण को लेकर बैंक कर्मचारी दूसरे दिन भी रहे हड़ताल पर, जगह जगह हुआ प्रर्दशन 

यूनाइटेड फोरम ऑफ बैंक यूनियन्स के बैनर तले कर्मचारियों ने सरकार के खिलाफ खोला मौर्चा

एटीएम खाली होने के चलते जरूरत बंद कार्डधारक दर दर भटकते नजर आये, नहीं हुई पैसो की निकासी

कासगंज। निजीकरण के खिलाफ दूसरे दिन भी प्रदेा भर के साथ कासगंज जनपद में भी बैंक कर्मचारी हड़ताल पर है। यूनाइटेड फोरम ऑफ बैंक यूनियन्स के बैनर तले नौ यूनियनों ने केंद्र सरकार के खिलाफ प्रर्दान किया। हड़ताल से बैंकों कामकाज प्रभावित हुआ है। कई क्षेत्रों में एटीएम खाली होने से लोगों को समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है।

         बैंक बचाओ, देश बचाओ, युवाओ का भविष्य बचाओ, वकर्स एकता जिंदाबाद यूएफबीयू जिंदाबाद के हाथों में पोस्टर लेकर जुलूस निकाल कर नारे लगा रहे हैं ये बैंक कर्मचारी है, जोकि सरकार द्वारा बैंको का निजीकरण किये जाने से सरकार से खासे नाराज हैं। बैंको में तालाबंदी कर प्रर्दान कर रहे नेताओं ने कहा कि सरकार लगातार अनुचित नीतियां लागू कर रही हैं। निजीकरण से आम आदमी को भी परेाानी का सामना करना पड़ेगा। बैंक यूनियनों के नेता अजीत सिंह मीडिया कर्मियों से मुखातिब होते हुए कहाकि प्रदेा भर की बैंकर्स यूनियन हड़ताल पर है।निजीकरण के विरोध में दो दिन की हड़ताल कर रहे हैं।ऐसे पहले लोग है, जो अपनी तनाख्वाह कटवाते हैं, उसके बाद हडताल करते हैं और ये हड़ताल हम अपने लिये नहीं कर रहे ये हड़ताल अपने लिये नहीं जनता के लिए गरीबो के लिए कर रहे हैं।कितने लोग सरकारी बैंको से जुडे हैं, और कितने लोग निजी बैंको से जुडे हैं। निजी बैंको में दस हजार या फिर पांच हजार बैलेंस रखना पड़ता है। गरीब खाताधारको से उम्मीद रखते हो, कि वह दस या पांच हजार रूपये अपने खाते में मेंटन कर पाया। या फिर वह अपना खाता चला पायेगा। हम दुबारा से उसी रिहायााी व्यवस्था में धकेले जा रहे हैं, जोकि आजादी के बाद से निकल कर आये थे। ये निजीकरण चंद पूंजीपतियों के हाथों में सौपा जा रहा है,जो गरीब है और वह हमेाा के लिए गरीब हो जायेगा। निजीकरण के बाद आम लोगों के लिए बैंकों से ऋण लेना मुकिल हो जाएगा। हड़ताल से प्रदेा भर में बैंकिंग सेवाएं प्रभावित हुई हैं।उन्होंने कहाकि हम पहले भी अपनी मांगो को मनवा कर रहे थे, पहले भी जीते थे, फिर भी जीतेंगे, सरकारें तो आती जाती रहेंगी।