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मेडिकल कॉलेज अस्पताल में कोरोना संक्रमित 75 वर्षीय बुजुर्ग की मौत


कोरोना के लिहाज से उत्तराखंड के लिए सुकून भरी खबर है। प्रदेश के दो पर्वतीय जिले रुद्रप्रयाग व टिहरी कोरोना के सभी मरीज स्वस्थ हो गए। इनमें अब कोरोना का एक भी एक्टिव केस नहीं है। अगले 28 दिन तक यहां कोई नया केस नहीं आता है तो दोनों ही जिले कोरोना मुक्त की श्रेणी में शामिल हो जाएंगे। सुखद पहलू यह कि चमोली, चंपावत, पौड़ी गढ़वाल व पिथौरागढ़ में भी भर्ती मरीजों की संख्या दहाई के अंक से नीचे है।


 


दून मेडिकल कॉलेज अस्पताल में बिजनौर के नजीबाबाद निवासी एक 75 वर्षीय बुजुर्ग की मौत हो गई है। वह कोरोना संक्रमित थे और विगत 24 जून से अस्पताल में भर्ती थे। दून अस्पताल के डिप्टी एमएस डॉ एनएस खत्री ने बताया कि बुजुर्ग को सांस,बीपी और फेफड़ों संबंधी बीमारी थी। उन्हें आइसीयू में रखकर उपचार किया जा रहा था। उनकी तबीयत मैं सुधार नहीं हुआ सोमवार रात करीब 1:00 बजे उनका निधन हो गया। जिला प्रशासन और पुलिस की मदद से बुजुर्ग के शव का अंतिम संस्कार कराया जा रहा है।


 


प्रदेश में अब तक कोरोना के कुल 3161 मामले आए हैं। जिनमें से 2586 यानि 81.81 फीसद स्वस्थ हो चुके हैं। वर्तमान में प्रदेश में 505 एक्टिव केस हैं। यहां गौर करने वाली बात यह है कि एक्टिव केस की तुलना में पांच गुणा मरीज अब तक ठीक हो गए हैं। कोरोना पॉजिटिव 28 मरीज राज्य से बाहर चले गए हैं, जबकि 42 की मौत हो चुकी है।


 


स्वास्थ्य विभाग से मिली जानकारी के अनुसार 1361 सैंपल की ताजा जांच रिपोर्ट मिली है। जिनमें 1324 की रिपोर्ट निगेटिव व 37 केस पॉजिटिव हैं। ऊधमसिंहनगर में सर्वाधिक 20 मामले आए हैं। जिनमें एक स्वास्थ्य कर्मी व तीन पूर्व संक्रमित व्यक्तियों के संपर्क में आए लोग हैं। इसके अलावा रामपुर से लौटे चार, मुरादाबाद व मुंबई से लौटे दो-दो और आंध्र प्रदेश के सिकंदराबाद, उप्र के सीतापुर, दिल्ली, गुरुग्राम, उप्र के नेहटौर से लौटे एक-एक व्यक्ति की रिपोर्ट पॉजिटिव है।


 


हरिद्वार में पांच नए मामले आए हैं। जबकि तीन की ट्रेवल हिस्ट्री अभी पता नहीं लग पाई है। सोमवार को जितने नए मामले आए उसके डेढ़ गुणा यानि 62 लोग स्वस्थ होकर घर चले गए हैं। इनमें देहरादून से 15, नैनीताल से तेरह, हरिद्वार से सात, बागेश्वर से छह, रूद्रप्रयाग, पौड़ी व चमोली से पांच-पांच और पिथौरागढ़, चंपावत व टिहरी से दो-दो मरीज डिस्चार्ज हुए हैं।


 


कोरोना से वरिष्ठ राज्य आंदोलनकारी की मौत


 


वरिष्ठ राज्य आंदोलनकारी 53 वर्षीय नंदन सिंह रावत व 86 वर्षीय सरोजनी देवी का निधन हो गया है। राज्य आंदोलनकारी मंच से जुड़े राज्य आंदोलनकारियों ने इनके निधन पर शोक जताया है। मंच के जिलाध्यक्ष प्रदीप कुकरेती ने बताया कि वरिष्ठ राज्य आंदोलनकारी नंदन सिंह रावत कोरोना से संक्रमित थे। उन्हें दिल्ली के गंगाराम अस्पताल में भर्ती कराया गया था। जहां उपचार के दौरान उन्होंने अंतिम सांस ली।


 


वह मूलरूप से अल्मोड़ा जिले के पत्थर कोट गांव निवासी थे। पिछले लंबे समय से वह दिल्ली के करमपुरा इलाके में रहते थे। उनका अंतिम संस्कार दिल्ली के बोध गया घाट पर किया गया। वहीं, वरिष्ठ राज्य आंदोलनकारी सरोजनी देवी पिछले लंबे समय से बीमार चल रही थी।


 


उनके पिता स्वतंत्रता संग्राम सेनानी थे। उनका अंतिम संस्कार हरिद्वार में किया गया। कहा कि पृथक राज्य आंदोलन के दौरान इन दोनों आंदोलनकारियों ने अहम भूमिका निभाई थी। राज्य आंदोलन के दौरान नंदन सिंह रावत जेल भी गये थे। वह राज्य चिह्नित आंदोलनकारी समिति के संरक्षक भी थे। श्रद्धांजलि देने वालों में जगमोहन सिंह नेगी, ओमी उनियाल, रामलाल खंडूड़ी, अशोक वर्मा, केशव उनियाल, जगमोहन रावत, वीरेन्द्र गुसाईं, मोहन खत्री, प्रभात डंडरियाल, गणेश डंगवाल, जयदीप सकलानी, विनोद असवाल, जीतपाल आदि राज्य आंदोलनकारी शामिल रहे।


 


मर्चेंट नेवी में कार्यरत युवक समेत चार संक्रमित


 


सोमवार का दिन दून के लिए भी सुकूनभरा रहा। यहां कोरोना के केवल चार नए मामले सामने आए हैं। इनमें एक मर्चेंट नेवी में कार्यरत युवक भी शामिल है। मुख्य चिकित्साधिकारी डॉ. बीसी रमोला ने बताया कि पटेलनगर इलाके में मर्चेंट नेवी में काम करने वाला एक युवक घर पर छुट्टी आया था। उसे वापस ज्वाइन करना है। जिससे पहले उसने अपनी जांच कराई थी। जिसमें वह पॉजिटिव पाए गए हैं। 


 


मसूरी के एक व्यक्ति की रिपेार्ट भी पॉजिटिव आई है। इसके अलावा दो अन्य लोगों में कोरोना संक्रमण पाया गया है। बता दें, जनपद देहरादून में अब तक कोरोना के 758 मामले आए हैं। जिनमें 603 लोग ठीक हो गए हैं। वर्तमान में 111 मरीज अलग-अलग अस्पतालों व कोविड-केयर सेंटरों में भर्ती हैं। कोरोना संक्रमित 25 लोगों की मौत हो चुकी है, जबकि 19 लोग राज्य से बाहर चले गए हैं। 


 


सेना के जवानों का होगा रैपिड टेस्ट 


 


सेना में कोरोना संक्रमण के मामले बढ़ने के बाद अब जवानों की रैपिड जांच कराने का फैसला लिया गया है। सीएमओ कार्यालय की ओर से सेना अस्पताल को 100 रैपिड एंटीजन किट दी गई हैं। इसके अलावा गर्भवतियों की भी ये जांच की जाएगी। मुख्य चिकित्साधिकारी डॉ. बीसी रमोला ने बताया कि महानिदेशालय से दो हजार रैपिड एंटीजन किट मिल गई है। जिसमें रिजल्ट 15 से 30 मिनट में आ जाता है। 


 


सेना को किट दी गई है। उनका कहना है कि जहां भी ज्यादा मामले सामने आएंगे, वहां पर ये किट दी जाएंगी। इसके अलावा इमरजेंसी या गर्भवती महिलाओं के ऑपरेशन के दौरान इन्हें प्रयोग किया जाएगा। ताकि उन्हें बिना वजह का इंतजार न करना पड़े।