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भारत नेपाल सीमा पर आवागमन के लिए भारतीयों के साथ दोहरे मापदंड


 


रूपईडीहा-बहराइच| इन दिनो नेपाल प्रहरी की ओर से जिस तरह से व्यवहार में अंतर देखा जा रहा है,उसे देखकर यह अंदाजा लगाया जा रहा है कि वो नेपालियो को भारत भेजने में तो सहयोग कर रहे है लेकिन भारतीयों को नेपाल जाने में अनेक प्रकार के मापदंडों को बताकर आनाकानी करने का काम कर रहे है,यही से उनके दोहरे मानसिकता को समझा जा सकता है।


कोविड-19 महामारी के कारण इंडो नेपाल बॉर्डर सील है,लेकिन खाद्य पदार्थ, पेट्रोल, डीजल,गैस, दवाएं, आदि बॉर्डर सील होने के बावजूद भारत की सीमा से होते हुए नेपाल में धड़ल्ले से जा रहे हैं किसी भी प्रकार की कोई रोक टोक नहीं की जाती है और अब बॉर्डर सील होने के वजह से भारत में काम करने वाले कामगार जो नेपाल को वापस चले गए थे वो अब लॉकडाउन खत्म होने के बाद काम पर वापस लौट रहे है जिनकी संख्या हज़ारो में हैं।इनको नेपाली सीमा जमुनहा पारकर रुपईडीहा होते हुए भारत आने में किसी प्रकार की समस्याओं का सामना नही करना पड़ता है


भारतीय सीमा में तैनात सशस्त्र सीमा बल के जवानों द्वारा सहयोग किया जाता है ।


भारतीय प्रशासन द्वारा नेपाली लोगों को सुविधाएं बॉर्डर सील होने के बाद भी दी जा रही है लेकिन नेपाली प्रशासन की ओर से जिस तरह की हरकतों को अंजाम दिया जा रहा है उसे कतई नजरअंदाज नहीं किया जा सकता है ।


आपको बताते चलें अगर कोई भारतीय नेपाल जाता है तो सर्वप्रथम जमुनहा पर उसका आधार कार्ड ले लिया जाता है और अगर बमुश्किल उसे आगे जाने भी दे दिया गया तो रास्ते में लगी सुरक्षा एजेंसियां भारतीयों से पूछताछ करती है। जबकि मामला महज आपसी मेलजोल के लिए सीमा के निकट आने जाने से संबंधित है दरअसल इस इलाके में दोनों तरफ शादियां होती रही है लिहाजा रिश्तेदारी निभाने के लिए लोग इन्हीं सीमाओं से आते जाते हैं लेकिन जब से चीन से भारत के संबंधों में तल्खी आई है तभी से नेपाल भारतीय सीमाओं पर लगातार कोई ना कोई खुराफात कर रहा है ।


जब से इस तरह का दुर्व्यवहार लोगों के साथ हो रहा है लोग सकते में हैं संदेह ऐसा भी जताया जा रहा है कि कहीं किसी की उकसाने से तो यह हरकत नहीं की जा रही है । भारत सरकार को इन सब का जवाब भी मांगना चाहिए ताकि यह पता चल सके कि इसके पीछे कारण क्या है क्योंकि लंबे अंतराल से बॉर्डर सील रहा है जिसकी वजह से भारतीय व्यापारियों के पैसे नेपाल में फंसे हुए हैं अगर उन व्यापारियों को नेपाल नहीं जाने दिया जाएगा तो विगत में भेजे गए माल का पैसा नहीं निकल पाएगा जिससे भारतीय व्यापारियों के लिए आर्थिक संकट खड़ा हो सकता है ।


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