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एक साल पहले डेढ़ करोड़ जारी होने के बावजूद अभी तक नहीं शुरु हुआ गौशाला का निर्माण


 


भिनगा-श्रावस्ती:प्रदेश की योगी सरकार गायों के सरंक्षण के लिए हर जिले में अस्थाई गौशाला का निर्माण कराने का आदेश दिया था। इसके लिए शासन द्वारा भारी भरकम धनराशि भी अवमुक्त की गयी थी। लेकिन सरकार के अस्थाई गौशाला की योजना कागजों तक हीं सिमट कर रह गई है। जिसकी वजह से नेशनल हाइवे समेत जिले की विभिन्न सड़कों पर लावारिस गौवंशों का झुण्ड देखा जा सकता है। इतना हीं नहीं जहां गौशाला बना भी है वहां से आये दिन गायों की भूख से मरने की खबर आती रही है। हद तो तब हो गई जब नगर पालिका अध्यक्ष भिनगा के प्रयासों से शासन द्वारा एक और गौशाला की स्वीकृत मिलने के एक साल बाद भी उक्त गौशाला का निर्माण कार्य शुरु नहीं कराया जा सका है। जिसके पीछे जमीन का आड़े आना बताया जा रहा है। इस गौशाला का अधर में लटकने की वजह से एक तरफ जहां किसान परेशान हैं, वहीं कभी पूजी जाने वाली गायें भिनगा कस्बे में दर-दर की ठोकरें खाने को मजबूर हैं।


इतना हीं नहीं सड़कों पर बैठी इन गायों की वजह से हीं सड़क दुर्घटनाओं में काफी इजाफा हुआ है। जानकारी के अनुसार भिनगा नगर पालिका क्षेत्र के वार्ड नंबर12 अब्दुल कलाम नगर में लगभग छह बीघे जमीन चारागाह के रूप में अभिलेखों में दर्ज है। जिसपर नगर पालिका अध्यक्ष अजय आर्य ने गौशाला निर्माण के लिए नगर पालिका बोर्ड की सहमति से दो वर्ष पूर्व शासन को एक पत्र भेजकर गौशाला निर्माण की मांग की थी। जिसपर शासन ने संज्ञान लेते हुए गौशाला निर्माण की स्वीकृति प्रदान करते हुए उसमें आने वाले खर्च का पहला किस्त एक करोड़ 55 लाख रुपए एक वर्ष पूर्व हीं आवंटित भी कर दिया था। मगर एक वर्ष बीत जाने के बाद भी अभी तक गौशाला का निर्माण कार्य शुरु नहीं कराया जा सका है। जो शासन के मंशा पर जिम्मेदारों द्वारा पानी फेरना हीं कहा जायेगा। इस सन्दर्भ में गौ रक्षा प्रमुख सोनू आजाद का कहना है कि गौशाला निर्माण के लिए जिले के प्रशासनिक अधिकारियों से कई बार बात की गई, मगर उनके द्वारा सिर्फ आश्वासन हीं मिला है। बजट आवंटित होने के एक वर्ष बाद भी गौशाला का निर्माण कार्य शुरु न कराना जिम्मेदारों के द्वारा सरकार की महत्वाकांक्षी योजनाओं पर पानी फेरने का काम किया जा रहा है। जिसकी शिकायत मुख्यमंत्री से की जायेगी।


वहीं इस सन्दर्भ में नगर पालिका अध्यक्ष अजय आर्य का कहना है कि गौशाला निर्माण के सम्बन्ध में कई बार प्रशासनिक अधिकारियों से बात की जा चुकी है। मगर उनके द्वारा अभी तक जमीन उपलब्ध नहीं कराया जा सका है। जिसकी वजह से गौशाला का निर्माण कार्य शुरु नहीं हो सका है। अभिलेखों में चारागाह के रुप में दर्ज एक जमीन पर गौशाला निर्माण का सुझाव दिया गया था। जिसे अधिकारियों ने यह कहते हुए खारिज कर दिया कि चारागाह की जमीन पर गौशाला का निर्माण नहीं हो सकता है। जबकि उक्त सरकारी जमीन पर अगल बगल के लोग कब्जा करने का प्रयास कर रहे हैं। वहीं दूसरी जमीन पशु चिकित्सालय भिनगा के निकट मौजूद है। जिसपर भिनगा के एक रसूखदार का अवैध कब्जा है। उसके लिए भी कई बार जिम्मेदार अधिकारियों से कहा गया, लेकिन राजनैतिक दबाव के चलते जिम्मेदार अधिकारी उसे खाली करा पाने में असमर्थ हैं। प्रशासन द्वारा जमीन उपलब्ध कराते हीं गौशाला का निर्माण कार्य शुरु करा दिया जायेगा।