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उच्च रक्तचाप व पक्षाघात (स्ट्रोक) के 95 साल के कोविड संक्रमित मरीज को बचाया।


 


95 साल के कोविड संक्रमित उच्च रक्तचाप व पक्षाघात (स्ट्रोक) के मरीज ने बीमारी को मात दी।


इटावा (सैफई) । सकट बिहारी यादव उम्र 95 वर्ष निवासी जागीर तहसील, मैनपुरी कोविड संक्रमित होने के साथ उच्च रक्तचाप एवं पक्षाघात (स्ट्रोक) से ग्रसित हो गये। बेहतर इलाज एवं देखरेख से ठीक होकर जहाॅ उन्होंने कोविड को मात दी वहीं स्वस्थ होकर अस्पताल से अपने घर लौटे। यह जानकारी विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो0 डा0 राजकुमार ने दी। उन्होंने बताया कि पूर्व जस्टिस माननीय रविन्द्र सिंह यादव के पिता सकट बिहारी यादव जिनकी उम्र 95 वर्ष है विश्वविद्यालय में मैनपुरी जिला अस्पताल से रेफर होने पर भर्ती किये गये। भर्ती के समय उनके दाहिने हाथ एवं पैर में पक्षाघात (स्ट्रोक) की शिकायत थी। भर्ती के दौरान कोविड-19 प्रोटोकाॅल के अनुसार उनकी कोविड-19 जाॅच की गयी तथा रिपोर्ट पाॅजिटिव आयी जिसके बाद उन्हें न्यूरोफिजिशियन डा0 रमाकान्त यादव तथा मेडिसिन विभाग के डा0 सुशील कुमार यादव की देख-रेख में पहले कोविड-19 अस्पताल में भर्ती किया गया तथा बेहतर इलाज तथा राज निर्वाण बटी (आरएनबी) के सेवन से 07 दिन के अन्दर मरीज ने चमत्कारिक रूप से कोविड संक्रमण को मात दी तथा उनकी रिपोर्ट निगेटिव आयी।


इसके बाद उन्हें आईसीयू में शिफ्ट कर दिया गया जहाॅ 12 दिन न्यूरोफिजिशियन डा0 रमाकान्त यादव तथा मेडिसिन विभाग के डा0 सुशील कुमार यादव की देख-रेख में गहन इलाज के बाद ठीक होने पर उन्हें अस्पताल से छुट्टी दे दी गयी। ठीक होने के बाद मरीज सकट बिहारी यादव ने विश्वविद्यालय के चिकित्सकीय व्यवस्थाओं की सराहना की तथा कहा कि भर्ती के दौरान उनके इलाज में लगे चिकित्सकों तथा हेल्थ केयर वर्कर्स ने उनकी बहुत सेवा की।


इस सम्बन्ध मेें इलाज करने वाले चिकित्सक एवं विश्वविद्यालय के प्रतिकुलपति न्यूरोफिजिशियन डा0 रमाकान्त यादव ने बताया कि भर्ती के वक्त सकट बिहारी यादव उम्र 95 वर्ष निवासी जागीर तहसील, मैनपुरी की हालत दाहिने हाथ एवं पैर में पक्षाघात (स्ट्रोक) तथा उच्च रक्तचाप के कारण बेहद नाजुक थी। मरीज की कोविड-19 आरटीपीसीआर जाॅच भी करायी गयी जो कि पाॅजिटिव आयी। रिपोर्ट पाॅजिटिव आने के बाद उनको विश्वविद्यालय के कोविड-19 अस्पताल में भर्ती कराया गया।


जहाॅ पर विश्वविद्यालय के कुलपति एवं जाने-माने न्यूरोसर्जन प्रो0 डा0 राजकुमार के विशेष निर्देशन तथा गाइडलाइन में मरीज का इलाज चला जिसमें विश्वविद्यालय द्वारा पूर्व में कोविड-19 के कई पाॅजिटिव मरीजों को ठीक करने वाली एलोवैदिक औषधी आरएनबी भी दी गयी। इस दौरान कोविड-19 अस्पताल के चिकित्सकों तथा हेल्थ केयर वर्कर्स ने मरीज का विशेष ध्यान रखा तथा मरीज कोविड कोे मात देने के बाद आईसीयू में शिफ्ट कर दिये गये। जहाॅ 12 दिन लगातार इलाज के बाद उनकी स्थिति में सुधार हुआ तथा उन्हें अस्पताल से छुट्टी दे दी गयी।


विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो0 (डा0) राजकुमार ने इलाज में लगी टीम के चिकित्सकों जिसमें प्रतिकुलपति डा0 रमाकान्त यादव, डा0 सुशील कुमार यादव, कोविड-19 अस्पताल के चिकित्सकों एवं हेल्थ केयर वर्कर्स को बधाई दी तथा मरीज के ठीक होने पर हर्ष जताया।