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इमाम हुसैन और शहीदाने कर्बला के चेहलुम पर शहर में हुईं मजलिसें


(इमामबाड़ों में हुआ ज़िक्रे शहादतैन व फ़ातिहा)


इटावा। इमाम हुसैन और शहीदाने कर्बला का चेहलुम आज गमगीन माहौल में मनाया गया। शिया और सुन्नी समाज ने कोविड - 19 के चलते सरकार की गाइडलाइन के अनुपालन में चेहलुम के अलविदाई ताजिये घरों पर रखकर सोशल डिस्ट्रेन्स के साथ गमे हुसैन व गमे शहीदाने कर्बला मनाया। इमामबाड़ों में ज़िक्रे शहादतैन व फ़ातिहा भी हुई।


चेहलुम के अलविदाई ताजिये ग़ुलामुस सैयदेन की ओर से अंजुमन स्कूल स्थित अमीर हैदर जाफरी के इमामबाड़े में और राहत अक़ील की ओर से सैदबाड़ा शरीफ मंजिल स्थित इमामबाड़े में रखे गए। अंजुमन स्कूल स्थित इमामबाड़े में रियाज़ सैयदेन व महजबी की तरफ से महिलाओं की मजलिस हुई और चेहलुम के अलविदाई ताजिये की ज़ियारत बरामद हुई। लोगों ने सोशल डिस्ट्रेन्स के साथ दोनों स्थानों पर पहुंचकर ताजियों व अलम की जियारत की। इसी क्रम में इमामबाड़ा घटिया अज़मत अली में राहत हुसैन रिजवी, आसिफ रिज़वी व काशिब की ओर से चेहलुम पर मर्दानी व महिलाओं की मजलिसें हुईं। इसके बाद आलमपुरा स्थित इमामबाड़े में शानू की ओर से इमाम हुसैन और शहीदाने कर्बला के चेहलुम पर मजलिस हुई। मजलिस में तकरीर करते हुए मौलाना सैयद अनवारूल हसन ज़ैदी ने कहा इमाम हुसैन और उनके 72 साथियों को तीन दिन की भूख प्यास में शहीद किया गया। घर की औरतो को बेपर्दा बाजार में घुमाया गया और कैदी बनाकर कैदखाने में डाल दिया गया। शहीदो में इमाम हुसैन के 6 माह के बेटे अली असगर भी शामिल हैं और 4 साल की बेटी जनाबे सकीना को कैदी बनाया। जनाबे सकीना कैदखाने में शहीद हो गई। इमाम हुसैन के बीमार बेटे इमाम सज्जाद पर भी बेपनाह जुल्म ढाये गए। इमाम हुसैन की बहिन जनाबे जैनब ने कूफ़े में अपने भाई की याद में मजलिस की बुनियाद रखी। आज पूरी दुनिया मे मजलिसें हो रहीं हैं। रसूल की नवासी जनाबे जैनब ने अपने काफिले के साथ कर्बला पहुंचकर इमाम हुसैन और शहीदाने कर्बला का चेहलुम मनाया।


अंजुमने हैदरी कमेटी के वरिष्ठ उपाध्यक्ष शावेज़ नक़वी ने बताया कि दरगाह हजरत अब्बास महेरे पर तनवीर हसन के घर चेहलुम की मजलिस के साथ अलम की जियारत बरामद हुई। शिया समाज के लोगों ने मजलिसों में शिरकत कर और दरगाह मौला अब्बास पहुंचकर गमे हुसैन मनाकर श्रद्धा सुमन अर्पित किए।