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आजादी के 73 वर्ष बाद भी गरीबों को आशियाना मयस्सर नही.....


चकरनगर (इटावा) । महात्मा गांधी की ग्राम स्वराज की परिकल्पना को पलीता लगा रहे हैं लोकतांत्रिक तरीके से चुने प्रतिनिधि तथा सरकार के मुल्जिम। वर्तमान पंचवर्षीय भी झूठे आश्वासन और इंतजार में बीत गई। मामला ग्राम पंचायत तेजपुरा के मजरा रनिया का है जहां पर यूं तो कई ग्रामीणों के पास घास फूस के घर के अलावा कुछ भी नहीं है। उन्हीं में से एक ग्रामीण राजेश उम्र 38 पुत्र रामसेवक ने बताया कि मैं पिछले बीस साल से इस घास फूस की झोपड़ी में रहता हूं मैं बीमार हूं और मैं मजदूरी भी नहीं कर सकता हमारे चार बच्चे हैं जिनमें तीन लड़कियां और एक लड़का है।


राजेश कुमार की पत्नी ने बताया कि हमारे पति को सांस की बीमार होने की वजह से मुझे मजदूरी करने जाना पड़ता है। जो पैसा में मजदूरी करके कमाती हूं वह घर के खर्चे एवं पति की दवाइयों में खर्च हो जाता है। तो मैं घर के कैसे बनवाऊं। इस पंचवर्षीय प्रधानी का समय व्यतीत हो गया पर मुझे कोई लाभ नहीं मिला। उक्त मामले की बातचीत के लिए ग्राम प्रधान से दूरभाष पर संपर्क किया तो संपर्क नहीं हो सका।