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ऐतिहासिक कार्तिक मेले का दूसरा पड़ाव सकुशल संपन्न, न्यायिक अधिकारी भी चले आस्था करने की डगर पर


अयोध्या। वैश्विक महामारी का रूप धारण कर चुके नोबेल कोरोनावायरस के संक्रमण के बीच राम नगरी के ऐतिहासिक कार्तिक मेले का दूसरा पर्व भी बुधवार को सकुशल शांति पूर्वक संपन्न हो गया। कोरोनावायरस को लेकर उपजे हालात के चलते इस बार पूर्व के वर्षों जैसी भीड़ तो नहीं उमड़ी लेकिन आस्था की डगर पर कदम बढ़ाने वालों की तादाद अच्छी खासी रही। न्यायिक अधिकारियों ने भी इस बार सामूहिक रूप से परिक्रमा की।


  पारंपरिक रूप से कार्तिक माह के शुक्ल पक्ष की एकादशी तिथि में होने वाली पंचकोसी परिक्रमा मुहूर्त के साथ ही जय श्री राम के उद्घोष के साथ शुरू हो गई। जगह जगह मुहूर्त के इंतजार में खड़े श्रद्धालुओं के जत्थों ने मुहूर्त लगते ही अलग-अलग जगहों से अपनी परिक्रमा का श्रीगणेश किया तो कुछ ही देर में मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान श्री राम की नगरी अयोध्या के चारों ओर श्रद्धालुओं की एक जंजीर सी बनने लगी। सूर्य की रश्मियों का ताप बढ़ने के साथ ही श्रद्धालुओं की आज जंजीर घनी होती गई और फिर विरल होने लगी। पूरे परिक्रमा मार्ग पर जय श्री राम का उद्घोष गूंजता रहा। बच्चे, बूढ़े, जवान, महिलाएं और अन्य पुण्य लाभ की कामना में 5 कोस की परिक्रमा पूरा के लिए उत्साह के साथ अपने कदम आगे बढ़ाते नजर आए।


वैसे तो हर वर्ष व्यक्तिगत रूप में न्यायिक के साथ विभिन्न अधिकारी परिक्रमा करते रहे हैं लेकिन इस बार जिले के न्यायिक अधिकारियों ने सामूहिक रूप से पंचकोसी परिक्रमा की। परिक्रमा करने वालों में जनपद न्यायाधीश के साथ मुख्य न्यायिक दंडाधिकारी और अन्य न्यायिक अधिकारी शामिल रहे। इन्हीं न्यायिक अधिकारियों ने इस वर्ष 14 कोसी परिक्रमा में श्रद्धालुओं की सेवा के लिए स्टाल भी लगाया था।


सुरक्षा और व्यवस्था के थे इंतजाम


पंचकोसी परिक्रमा को शत-शत शांतिपूर्वक संपन्न कराने के लिए जिला प्रशासन की ओर से सुरक्षा और व्यवस्था को लेकर पुख्ता प्रबंध किए गए थे। जगह जगह पुलिस की पिकेट लगाई गई थी और सीसीटीवी कैमरे से निगरानी की जा रही थी। प्रशासन की ओर से जोनल और सेक्टर के साथ स्टैटिक मजिस्ट्रेट लगाए गए थे। पब्लिक अनाउंस सिस्टम से आधे परिक्रमा क्षेत्र को कवर किया गया था जिससे सूचनाएं तत्काल श्रद्धालुओं तक पहुंचाई जा सके। पूरे परिक्रमा मार्ग पर जगह-जगह स्वास्थ शिविर सहायता शिविर के साथ टॉयलेट व अन्य सुविधाओं की व्यवस्था की गई थी। मेला कंट्रोल रूम से हर गतिविधि की निगरानी की जा रही थी और अधिकारियों को पल-पल की खबर पहुंचाई जा रही थी।


फिर भी दिखी समन्वय की कमी


- जिला प्रशासन की ओर से पंचकोसी परिक्रमा को लेकर व्यवस्था के चाक-चौबंद होने का दावा किया गया था बावजूद इसके अफसरों में समन्वय की कमी दिखी। कोरोना और प्रतिबंधों के चलते इस वर्ष परिक्रमा में अपेक्षाकृत वीर काफी कम थी बावजूद इसके पुलिस में आवागमन के प्रति ज्यादा सख्ती शुरू कर दी। इसको लेकर उदया चौराहे पर मीडिया कर्मियों और पुलिस में नोकझोंक हुई।परिक्रमा क्षेत्र के विभिन्न इलाकों में मीडिया कर्मियों को आने जाने से भी रोका गया। मामला जिला अधिकारी के संज्ञान में लाए जाने के बाद पुलिस ने हालात के अनुरूप व्यवस्था बनाई और रोक रोक कर आवागमन को भी सुचारू किया। जिला प्रशासन की ओर से कोविड-19 के निर्देशों का अनुपालन कराने का दावा किया गया था, लेकिन यह दावा हवा-हवाई साबित होता नजर आया। तमाम श्रद्धालु बिना मास्क लगाए ही परिक्रमा पथ पर दिखे और सोशल डिस्टेंसिंग का पालन नहीं हुआ।


अब पूर्णिमा स्नान की तैयारी में जुटा प्रशासनिक अमला


कार्तिक मेले का दूसरा पड़ाव सक्षम संपन्न होने के बाद अब जिला प्रशासन कार्तिक मेले के अंतिम पर्व पूर्णिमा स्नान को सकुशल संपन्न कराने की कवायद में जुट गया है। कार्तिक पूर्णिमा स्नान 30 नवंबर को होना है। जो धार्मिक मान्यता के मुताबिक पूर्णिमा की तिथि प्रातः काल से शुरू होकर दिन भर चलेगा। पूर्णिमा स्नान को सकुशल संपन्न कराने के लिए जिला प्रशासन की ओर से राम नगरी को तीन सुपर जोन, 6 जोन और 27 सेक्टर में बांटा गया है। सभी के प्रभारी के रूप में मजिस्ट्रेटों की तैनाती की गई है। साथ ही छह मजिस्ट्रेट को आरक्षित रखा गया है। अयोध्या नगर निगम को राम नगरी की साफ-सफाई के लिए कहा गया है।