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ग्राम पंचायत शौच मुक्त अभिलेखों में भले दर्ज हो गया हो परंतु जमीनी हकीकत कुछ और ही बयां कर रही


मसौली, बाराबंकी। ग्राम पंचायत शौच मुक्त अभिलेखों में भले दर्ज हो गया हो परंतु जमीनी हकीकत कुछ और ही बयां कर रही है। इस ग्राम पंचायत में ठेकेदारी प्रथा के तहत शौचालयों का निर्माण किया गया है, जिसके चलते जमकर अनियमितता देखने को मिल रही है। जबकि एक दशक पूर्व शौचालय मुक्त अभियान में सफलता मिलने पर तत्कालीन राष्ट्रपति श्रीमती प्रतिभा पाटिल द्वारा ग्राम प्रधान को सम्मानित किया गया था।


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विकास खण्ड मसौली में 56 ग्राम पंचायत है। जिसमें शौच मुक्त को लेकर हजारों की संख्या में शौचालयों का निर्माण कराया गया है। परंतु निर्माण के दौरान ठेकेदारी प्रथा के चलते जमकर घटिया सामग्री एवं मानक विहीन शौचालय के निर्माण के चलते तमाम कमियां उभर कर सामने आ रही है परंतु जिम्मेदार अधिकारी एवं कर्मचारी मूर्ख दर्शक बनने के सिवाय कुछ नहीं कर पा रहे हैं उदाहरण के तौर पर ग्राम पंचायत मुबारकपुर में 253 शौचालय निर्माण का लक्ष्य था। जिसमें करीब लगभग 150 का निर्माण हुआ है। जिसमें कोई शौचालय में जर्जर दरवाजा होने के कारण टूट चुके हैं तो कहीं पर पानी टंकी के पत्थर टोटी नदारद हो चुकी है तो कहीं शौचालय के लिए बने दो गड्ढे के बजाय एक एक गड्ढे का निर्माण किया गया है


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ऐसे ही तमाम तरह की समस्याओं से पीड़ित लाभार्थी शौच के लिए शौचालय की बजाय आज भी खुले जाने को मजबूर है।जबकि 2008 में विकास खण्ड मसौली की ग्राम पंचायत मुबारकपुर को शौचालय मुक्त अभियान सफल होने पर निर्मल ग्राम के रूप में चयन हुआ था तत्कालीन राष्ट्रपति श्रीमती प्रतिभा पाटिल ने ग्राम प्रधान शेष कुमारी को सम्मानित किया गया था। शौचालय निर्माण की बात की जाए तो विकास खंड मसौली की ग्राम पंचायत मुबारकपुर की तरह ही अन्य ग्राम पंचायतों में अनियमितता देखी जा सकती है।