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कलियुग के प्रभाव से बचने के लिए सत्संग एवं भागवत भजन जरूरीः आचार्य रामजी


रामसनेहीघाट,बाराबंकी।कलियुग मनुष्य की बुद्धि को भ्रष्ट नष्ट कर कुमार्गी बनाकर उसे नरकगामी बना देता है जैसा कि राजधर्म का पालन कर सतमार्ग पर चलने वाले सूर्यवंशी राजा परीक्षित के साथ हुआ और उसका दुष्परिणाम उन्हें भुगतना पड़ा।कलियुग के प्रभाव से बचने के लिए सत्संग भागवत भजन जरूरी होता है।यह बात असंद्रा बाजार में चल रही श्रीमद् भागवत कथा के दूसरे दिन चित्रकूट धाम से पधारे कथा व्यास आचार्य राम जी पांडेय ने राजा परीक्षित की कथा का मनोहारी चित्रण आयामों में प्रस्तुत करते हुए कहा।


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उन्होंने कहा कि संत और सज्जन की उपेक्षा व उनके साथ हुए दुर्व्यवहार मनुष्य को शापित कर डालते हैं , वह चाहे कितना ही पराक्रमी व शक्तिशाली क्यों न हो।उसे श्राप से मुक्ति के लिए उसे निश्चित रूप से साधन और उपक्रम करने पड़ते हैं।संत एवं सज्जन दोनों कलियुग के प्रभाव से मुक्त होते हैं क्योंकि दोनों पर ईश्वर की महती कृपा रहती है और दोनों रातदिन ईश्वरीय भजन एवं ईश्वरीय कार्यों में रत रहते हैं।उन्होंने कहा कि अपनी मृत्यु के भय से श्राप मुक्त होने के लिए राजा परीक्षित को अन्ततः संतों की शरण में जाना पड़ा और उनकी सलाह पर उन्हें श्रीमद् भागवत कथा सुनकर मोक्ष के सभी साधन जुटाने पड़े जो एक मनुष्य के लिए नितांत आवश्यक हैं।


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श्रीमद्भागवत पुराण कथा मनुष्य के जीवन के लिए एक संजीवनी है कि उसका अनुसरण तथा श्रवण व्यक्ति को इस लौकिक जगत में अलौकिक बनाकर कलियुग के कुप्रभाव से मुक्त देता है।इस अवसर पर डॉ पंकज गुप्त,संजय गुप्त , त्रिशूल पाणि शुक्ल , डॉ एम.एल. साहू सहित क्षेत्र के तमाम गणमान्य नागरिक उपस्थित रहे।