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तकनीकी पहलुओं पर मंथन कर रही विशेषज्ञ समिति, 15 दिसंबर तक मंदिर निर्माण के लिए ट्रस्ट को सौंपनी है रिपोर्ट



अयोध्या। राम जन्म भूमि पर भव्य राम मंदिर निर्माण के लिए श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट और राम मंदिर निर्माण समिति की ओर से गठित 8 सदस्य विशेषज्ञ समिति विभिन्न पहलुओं पर चिंतन मंथन में जुटी है। विशेषज्ञ समिति को 15 दिसंबर तक ट्रस्ट और निर्माण समिति को आप अपनी रिपोर्ट कंपनी है जिससे राम मंदिर निर्माण को लेकर कवायद आगे बढ़ सके।

अयोध्या विवाद में जमीन के मालिकाना हक मामले की सुनवाई करते हुए देश की सर्वोच्च अदालत सुप्रीम कोर्ट ने विवादित जमीन का फैसला विराजमान रामलला के पक्ष में दिया है। राम जन्मभूमि पर भव्य राम मंदिर के निर्माण और इसके देखरेख के लिए सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर केंद्र सरकार की ओर से श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट का गठन किया गया है। ट्रस्ट की ओर से राम मंदिर निर्माण के लिए वरिष्ठ नौकरशाह नृपेंद्र मिश्र की अध्यक्षता में राम मंदिर निर्माण समिति का गठन हुआ है और ट्रस्ट तथा निर्माण समिति राम मंदिर निर्माण को लेकर कई दौर की बैठकें कर चुका है। जन्म भूमि पर बनने वाले विश्व के सबसे विशाल का ऐतिहासिक नागर शैली के राम मंदिर के निर्माण को लेकर तमाम तकनीकी पहलुओं पर काम किया जा रहा है। इसी के तहत कार्रवाई संस्था लार्सन एंड टूब्रो के विशेषज्ञों की देखरेख में राम मंदिर के फाउंडेशन के लिए होने वाली पाइलिंग के फाउंडेशन की टेस्टिंग कराई गई है। अपंग लोगों की आस्था और आकांक्षा के अनुरूप राम मंदिर निर्माण के लिए ट्रस्ट और निर्माण समिति कोई भी चूक नहीं होने देना चाहता इसको लेकर देशभर के नामचीन संस्थाओं के साथ नामचीन विशेषज्ञों को योजना से जोड़ा गया है और सभी का सुझाव वह सहयोग लिया जा रहा है। पाइलिंग टेस्टिंग रिपोर्ट पर विस्तार से विचार मंथन और आगे की कार्य योजना के लिए सुझाव की खातिर ट्रस्ट और निर्माण समिति की ओर से आईआईटी दिल्ली के पूर्व निदेशक प्रो. वी.एस.राजू की अध्यक्षता में 8 सदस्यीय विशेषज्ञ समिति गठित की गई है।


राम मंदिर निर्माण समिति ने मंदिर निर्माण को लेकर एक और अधिसूचना जारी करते हुए नए 8 सदस्य विशेषज्ञ समिति का गठन किया है। विशेषज्ञ समिति में केंद्रीय भवन निर्माण एवं शोध संस्थान रुड़की के निदेशक प्रो.एन.गोपलाकृष्णन को कन्वेयर के साथ प्रो.एस.आर.गांधी निदेशक, एनआईटी, सूरत,प्रो.टी.जी. सीताराम: निदेशक, आईआईटी, गुवाहाटी,

प्रो. बी भट्टाचार्जी एमेरिटस-प्रोफेसर, आईआईटी, दिल्ली,

ए.पी. मुल सलाहकार टीसीई, प्रो. मनु संथानम आईआईटी, मद्रास व प्रो. प्रदीपता बनर्जी आईआईटी, मुंबई को सदस्य बनाया गया है।

देश के टॉप इंजीनियरों और तकनीकी विशेषज्ञों कि यह समिति प्रस्तावित राम मंदिर निर्माण को लेकर विभिन्न भू-तकनीकी सुझावों को ध्यान में रखते हुए उच्चतम गुणवत्ता और दीर्घायु के साथ मंदिर निर्माण के लिए अपना सुझाव सौपेंगी।

श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट का कहना है कि योजना के मुताबिक मानकर चला जा रहा है कि नागर शैली में बनने वाले राम मंदिर की उम्र कम से कम 1000 साल की हो। ऐसे में निश्चित रूप से फाउंडेशन और नींव की आयु कहीं इससे ज्यादा होनी चाहिए। इसी को लेकर परिसर में पाइलिंग का फाउंडेशन बनवा परीक्षण कराया गया है। इस परीक्षण रिपोर्ट पर विचार विमर्श और ट्रस्ट को सुझाव देने के लिए आठ सदस्य विशेषज्ञ समिति गठित की गई है। विशेषज्ञ समिति विभिन्न परीक्षण रिपोर्ट पर चिंतन मंथन कर रही है और जल्द ही अपनी रिपोर्ट सौंप देगी। विशेषज्ञ समिति की सलाह और रिपोर्ट के आधार पर राम मंदिर निर्माण का कार्य आगे बढ़ाया जाएगा।