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जमीन से 16.5 फीट ऊंचा होगा राम मंदिर का फाउंडेशन, परिसर की मेन रोड से गहराई को लेकर ट्रस्ट ने तैयार किया खाका


अयोध्या। राम जन्म भूमि पर बनने वाले प्रस्तावित ऐतिहासिक नागर शैली के राम मंदिर की झलक राम नगरी समेत आसपास के इलाकों से स्पष्ट दिखे इसको लेकर ट्रस्ट में फाउंडेशन को ऊंचा बनाने का निर्णय लिया है। राम जन्मभूमि परिसर की गहराई मेन सड़क तथा राम नगरी की अपेक्षा काफी अधिक है। इसको लेकर यह खाका तैयार किया गया है। तय खाके मुताबिक साढ़े 16 फीट का फाउंडेशन बनाया जाएगा इस पर राजस्थान के लाल बलुआ पत्थरों की नक्काशी वाला राम मंदिर खड़ा किया जाएगा। फाइलिंग टेस्टिंग रिपोर्ट के आधार पर 8 सदस्य विशेषज्ञ समिति की ओर से मिलने वाली रिपोर्ट और सुझाव के पूर्व श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र राम मंदिर निर्माण को लेकर विभिन्न पहलुओं पर कार्ययोजना तैयार करने में जुटा है।

   सोमवार को श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय ने बताया कि राम जन्म भूमि पर प्राचीन नागर शैली में बनने वाला विशालकाय राम मंदिर तीन मंजिला होगा । मंदिर के प्रत्येक मंजिल की ऊंचाई होगी 20 फ़ीट होगी और मंदिर की कुल लंबाई 360 फीट तथा चौड़ाई 235 फीट होगी। राम मंदिर का फर्श भूतल से 16.5 फीट ऊंचा होगा अर्थात इतनी ऊंचाई का बिना किसी लौह तत्व का इस्तेमाल किए हुए मंदिर के परिमाप के आकार का पक्का फाउंडेशन निर्मित कराया जाएगा। उन्होंने बताया कि फाउंडेशन को समाहित करते हुए भूतल से गर्भ गृह के शिखर की कुल ऊंचाई 161 फीट होगी। श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के महासचिव ने बताया कि जन्मभूमि पर भव्य राम मंदिर निर्माण के लिए फाउंडेशन निर्माण और परिसर के विकास का कार्य देश की जानी-मानी निर्माण संस्था लार्सन एंड टूब्रो को दिया गया है और 10 तथा निर्माण समिति ने इसके लिए लिखित रूप से अनुबंध किया है। निर्माण कार्य में तकनीकी व अन्य सुझाव देने के लिए तथा राम मंदिर निर्माण समिति ने सलाहकार के रूप में टाटा कंसल्टेंसी से अनुबंध किया है। जबकि फाउंडेशन के ऊपर पत्थर संबंधी समस्त निर्माण कार्यों का अनुबंध देश के जाने माने वास्तुकार सोमपुरा के साथ हुआ है। सोमपुरा संस्थान की ओर से ही राम जन्म भूमि न्यास के नेतृत्व में प्रस्तावित राम मंदिर का मॉडल तैयार किया गया था और न्यास की कार्यशाला में कई वर्षों से पत्थरों की तराशी का काम कराया जा रहा है।

भौगोलिक स्थिति के आधार पर चल रहा है चिंतन मंथन

श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्र्स्ट और राम मंदिर निर्माण समिति की ओर से बीते 5 अगस्त को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के हाथों प्रस्तावित प्राचीन नागर शैली में बनने वाले राम मंदिर को लेकर भूमि पूजन कराया था। विश्व के सबसे विशालकाय मंदिर के निर्माण के लिए श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट और राम मंदिर निर्माण समिति तकनीकी पहलुओं पर देश की जानी-मानी संस्थाओं तथा विशेषज्ञों का सहयोग ले रही है। भूकंप, आपदा तथा अन्य भौगोलिक परिस्थितियों के बावजूद जन्म भूमि पर बनने वाले राम मंदिर की उम्र कम से कम 1000 साल हो, इसको लेकर मृदा समेत अन्य परीक्षण कराया गया है। इस परीक्षण में

धरती के नीचे 200 फीट गहराई पर जमीन के नीचे 200 फ़ीट तक भुरभुरी बालू पाई गई है। गर्भ गृह के पश्चिम में कुछ दूरी पर सरयू नदी का प्रवाह है। कार्रदाई संस्था की ओर से राम मंदिर के भार वाहन क्षमता को सहने तथा भूकंप आज की स्थिति में भी चट्टान की तरह अधिक रहने के लिए जमीन के 100 फीट नीचे पाइलिंग को लेकर फाउंडेशन डलवा इसकी क्षमता का परीक्षण कराया है। इस पाईलिंग परीक्षण रिपोर्ट पर आईआईटी मुंबई आईआईटी दिल्ली आईआईटी चेन्नई आईआईटी गुवाहाटी व केंद्रीय भवन अनुसंधान संस्थान रुड़की के इंजीनियर आपस में परामर्श निर्माण शुरू करने के लिए अपने परामर्श को अंतिम रूप देने में जुटे हैं।

श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय का कहना है कि राम नगरी की भौगोलिक परिस्थितियों में 1000 वर्षों के आयु वाले पत्थरो के मंदिर का भार सहन कर सकने वाली मजबूत और टिकाऊ नीव की की कार्य योजना विशेषज्ञ समिति तैयार कर रही है। यह कार्य योजना तैयार होने के बाद शीघ्र ही नीव का निर्माण कार्य प्रारंभ करा दिया जाएगा।