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बौंडी में नौ दिवसीय श्रीमद्भागवत भागवत कथा एवं श्री राम विवाह उत्सव का आयोजन




 बौंडी(बहराइच)। बुरे काम का बुरा नतीजा ना मानो तो करके देखो। जैसे गोकर्ण भगवत भक्त थे और उनका भाई धुंधकारी अधर्मी था जो वैश्याओं के साथ रमण करता था। अंतत: वैश्याओं ने उसका सब कुछ लूट लिया और एक दिन उसकी हत्या कर दी। धुंधकारी की अकाल मृत्यु होने के कारण प्रेत योनि में गया। भाई गोकर्ण ने प्रेत योनि से मुक्ति दिलाने के लिये सूर्य भगवान के बताये सूत्र पर श्रीमद भागवत कथा का आयोजन किया और भाई धुंधकारी को कथा सुनायी जिसके श्रवण से धुंधकारी को प्रेत योनि से मुक्ति मिली। इस कथानक से स्पष्ट है कि कर्म, धर्म मनुष्य को संयमित और वेद रीति नीति से करना चाहिये और भाई से रंजिश नहीं करना चाहिये आखिर में भाई ही भाई के काम आता है।

उक्त उद्गार बौंडी कस्बे के बाजार में चल रही श्री रामजानकी मन्दिर प्रांगण में आयोजित नौ दिवसीय सरस संगीतमयी श्रीमद भागवत कथा एवं श्री रामविवाहोत्सव कार्यक्रम में सुनाते हुये वृन्दावन से आये व्यास पं.प्रेम कृष्ण शास्त्री जी नेद्वितीय दिवस की कथा में व्यक्त किये।उन्होंने आत्म देव ब्राम्हण का कथानक बखान करते हुये श्रीमद भागवत महापुराण कथा के महत्व बताया। उनका कहना था कि आत्म देव के दो पुत्र गोकर्ण और धुंधकारी थे। जिसमें गोकर्ण भगवान का सच्चा भक्त और धुंधकारी अधर्मी और पातकी कर्म में लिप्त था। धुंधकारी ने वैश्याओं पर सब कुछ लुटा दिया था। अंत में वैश्याओं ने उसे मार दिया जिससे वह प्रेत योनि में चला गया। भाई गोकर्ण ने सूर्य की आराधना की तो उन्होंने मुक्ति बतायी। भागवत महापुराण सुनाने को कहा बस क्या था गोकर्ण ने श्रीमद भागवत महापुराण का प्रतिष्ठान किया। धुंधकारी की प्रेत आत्मा का आहवान कर उसे पुराण सुनायी जिससे उसकी मुक्ति हुई और वह श्रीहरि के धाम गया। शास्त्री जी ने कहा कि कर्म और धर्म मनुष्य को उचित करने चाहिये और हिस्सा बंटवारा को लेकर आपस में भाई से रंजिश विवाद नहीं करना चाहिये। अंतत: भाई ही भाई के काम आता है। उन्होंने कहा कि श्रीमदभागवत महापुराण को नियमित नियम संयम पूर्वक सुनने से जीव को सुख शांति और अंत में मुक्ति प्राप्त होती है।द्वितीय दिवस की कथा में मुख्य यजमान के रूप में सुरेश कुमार तिवारी, श्यामजी तिवारी,उमेश्वर पांडेय, रमेश तिवारी,दिनेश तिवारी रहे। इस दौरान भास्कर तिवारी, मिथिलेश शर्मा, बिहारी तिवारी, अमरेंद्र तिवारी, रवि तिवारी, शिवाजी सिंह, हर्षवर्धन पांडे, जगत वर्मा, ताराचंद जयसवाल, सूरज जयसवाल,सुधीर गुप्ता, केशव यज्ञसेनी,रामकिशोर गुप्ता, समेत सैकड़ों भक्त मौजूद रहे।