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स्थानान्तरण नीति की नियमावली जूगाड़ के सामने सरकार बौनी ?



धौरहरा खीरी:जिले के विभिन्न विभागों में वर्षों से जमें कर्मचारियों को देखकर ऐसा प्रतीत होता है कि सरकार की स्थानान्तरण नीति केवल कुछ अधिकारियों तक ही सीमित होकर रह गई है और जूगाड़ वाले कर्मचारियों के लिए स्थानान्तरण नीति एक मजाक से अधिक कुछ नहीं है। बहुत से विभागों में वर्षों से जिले में तैनात कर्मचारी स्थानान्तरण नीति को मुंह चिढ़ाते देखे जा सकते हैं। एक ओर जहां कुछ कर्मचारियों को अल्प समय में ही स्थानान्तरण नीति के तहत स्थानांतरित कर दिया जाता है तो उसी विभाग में लगभग समकक्ष पद पर तैनात जमें कर्मचारी शायद स्थानान्तरण पर गए कर्मचारियों को अपने मुंह पर एक तमाचे जैसा प्रतीत होता होगा कि काश इस जमें कर्मचारी जैसा मेरा भी जूगाड़ होता तो मुझे भी स्थानान्तरण नीति की यह नियमावली जो जूगाड़ के सामने बौनी है के तहत हो रही स्थानान्तरण की किल्लत न झेलनी पड़ती। बताया जाता है कि एक जगह पर वर्षो से जमें रहने से जो कर्मचारी स्थानीय राजनीति में रुचि लेने लगते हैं तो उनका उसमें दखल होने लग जाता है और उसको इस राजनैतिक दखल का मौके पर लाभ भी प्राप्त होता है साथ में धन बल तो रहता ही है और यह दोनो बल मिलकर उसको वहां पर बलशाली बना देते हैं और कर्मचारी बल पूर्वक वहां पर चिपका रहता है चूंकि अधिकारी गण भी उसकी पहुंच के आगे नतमस्तक हो जाते हैं इसलिए तैनाती स्थल पर उसका एक विशेष प्रकार का दबदबा जैसा कायम रहता है और वह जनता का दोहन शोषण कर भ्रष्टाचार को बढ़ावा देता रहता है। यदा कदा अगर कोई उनके इस विषय में आवाज उठाता भी है तो उसे येन केन प्रकारेण चुप करा दिया जाता है। कोई कर्मचारी तो खैर कुछ कह ही नहीं सकता क्योंकि उसके मुंह पर बड़ी मुश्किल से मिली नौकरी का भय लगा रहता है जिसके चलते वह यह अन्याय झेलता रहता है। उदाहरण के लिए जनपद के विकास खंड धौरहरा में करीब 20 वर्षों से जमे ग्राम पंचायत अधिकारी राजेश वर्मा जिन्होंने अपने दबदबे के चलते ब्लाक में एडीओ पंचायत का भी महत्व पूर्ण पद हथिया रखा है साथ ही विकास क्षेत्र की 9 बड़ी ग्राम पंचायतों का चार्ज लेकर ग्रामों में विकास कार्यों को अंजाम दे रहे हैं अब इनके द्वारा कराये गए विकास कार्यों हाल ही में बनवाए गए सामुदायिक शौचालयों, शौचालयों,आवासों आदि की गुणवत्ता की अगर निष्पक्ष जांच करायी जाय तो किए गए भ्रष्टाचार का पोलमपोल हो जायेगा। इनकी पहुंच का तो अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि इनके स्थानान्तरण के लिए की गई सांसद की संस्तुति भी बौनी साबित हुई।