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ग्राम पंचायत में बने शौचालय कुछ समय में ही हो गए जर्जर, अधबने में ही समुदायिक शौचालय दे गया दरार आखिरकार कौन होगा जिम्मेदार ?



धौरहरा-खीरी:गरीबों के नाम पर चलने वाली योजनाएं महज एक दिखावा भर हैं हकीकतन इन योजनाओं में गरीबों के लिए खर्च किए जा रहे पैसों में भ्रष्टाचार का घुन लगाकर इन जनप्रतिनिधियों कर्मचारियों अधिकारियों ने अपने घरौंदे एक तीन के मसाले से भी शायद उच्च कोटि की गुणवत्ता से करोडों खर्च कर बनवाए जाते हैं और गरीबों को ऐसा बनवाकर दिया जाता है कि उसकी जितनी तारीफ की जाय उतनी कम है। इन लोगों ने स्वच्छता मिशन के तहत शौचालय भी ऐसे बनवा दिए गए जिनकी दीवालों पर अगर एक भारी हाथ भी लग जाय तो पूरा शौचालय ही जमींदोज हो जायगा। कहने को तो यह है कि लाभार्थी को पैसा उसके खाते में दिया जाता है लेकिन इसमें सेंध लगाने वाले मास्टर माइंड सेंध लगाकर माल हड़प कर ही लेते हैं उस पर जब भ्रष्टाचार को जिम्मेदार अधिकारियों का ही संरक्षण प्राप्त हो तो फिर तो कहना ही क्या है। विकास खंड धौरहरा में वर्षों से जमे एक ग्राम पंचायत अधिकारी राजेश वर्मा के पास विकास खंड की बड़ी बड़ी पंचायतों का जिम्मा है।साथ ही में विकास खंड का बेहद महत्वपूर्ण पद एडीओ पंचायत का भी संभाल रखें हैं।


 इनकी पंचायतों में सरकार ने तो पानी की तरह पैसा बहाया है लेकिन सचिव और प्रधान ने गांव के विकास की बजाय अपने विकास पर विशेष ध्यान दिया। इनकी 9 ग्राम पंचायतों में से केवल एक ही ग्राम पंचायत का जिम्मेदार अधिकारी स्थलीय और निष्पक्ष निरीक्षण कर लें तो दूध का दूध पानी का पानी सामने आ जाएगा। ग्राम पंचायत वाली के 12 गांवों में से केवल 2 गांवों की शौचालय और आवासों की ही तस्वीरों से ही अंदाजा लगाया जा सकता है कि सफेदपोश नेताओं और उच्च अधिकारियों के मिले संरक्षण से इन महोदय के हौंसले कितने बुलंद हैं। आपको बताते चलें कि विकास खंड धौरहरा की ग्राम पंचायत वाली व जंगलवाली में प्रधानमंत्री की स्वचछ भारत मिशन योजना के तहत बनाए गए शौचालयों की स्थिति बेहद दयनीय है। 




यहां तक केवल 12 गांवों में से 2 गांव में लगभग शौचालयों दयनीय स्थिति है पता नहीं कितने समय गिर जाएं ऐसा अंदाजा लगाया जा सकता है कि मुरादगर की घटना की शिकार विकास खंड धौरहरा की ग्राम पंचायत वाली और जंगलवाली, न हो जाए और कुछ अपूर्ण भी हैं। आपकों बता दें ग्राम पंचायत जंगलवाली के पहडियापुर बाजार में अर्धनिर्मित सामुदायिक की दीवाल व लिंटर दरार देकर हुए भ्रष्टाचारों की पोल खोलने के लिए मजबूर हैं। कुछ लाभार्थियों का कहना है कि ग्राम प्रधान और ग्राम पंचायत अधिकारी ने ठेकेदारों को यह जिम्मा सौंप दिया था जो घटिया सामग्री का प्रयोग करके सरकार की इस योजना को पलीता लगाने का काम कर रहे हैं।