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रिबोर के नाम पर निकाले जाते लाखों रुपए, फिर भी गांवों में नल हैं खराब.....



धौरहरा खीरी:जहां सरकार विभिन्न योजनाएं बना कर देश की तस्वीर बदलने के लिए हर संभव प्रयास कर रही है वहीं जिम्मेदार अधिकारी और कर्मचारी सरकार की योजनाओं को पलीता लगाने का काम कर रहे हैं। सूत्रों के मुताबिक सरकार की योजनाएं धरातल पर उतरते उतरते मात्र 40- से 50% में ही सिमट जाती हैं। इससे सरकार के मंसूबों पर पानी फिरता जा रहा है। जबकि कागजों पर योजनाएं शत प्रतिशत दिखा दी जाती हैं। प्रश्न यह उठता है कि क्या अधिकारी बिना स्थलीय निरीक्षण किए बिना ही योजनाओं को शत प्रतिशत घोषित कर देते हैं या श्रृंखला की हिस्सेदारी से शत प्रतिशत योजनाएं धरातल पर नहीं उतर पाती हैं। आपको बताते चलें जहां ग्राम पंचायत अधिकारी और ग्राम प्रधान की सांठगांठ से नल रिबोर के नाम पर लाखों रुपए सरकारी खजाने से निकाल लिया जाता है और गांवों में रिबोर मात्र कागजों पर ही रह जाता है। ग्राम प्रधान और ग्राम पंचायत अधिकारी रिबोर फर्म मालिकों से अच्छी सांठगांठ कर के रिबोर के नाम पर लाखों रूपए निकाल कर बंदरबांट कर लेते हैं।शायद इसी वजह से फर्म मालिक विकास खंड में ग्राम पंचायत अधिकारी राजेश वर्मा के इर्द-गिर्द ही घूमा करते हैं। एक ऐसा ही मामला विकास खंड धौरहरा की ग्राम पंचायत जंगलवाली में आया है जहां मिंहीलाल के घर के पास लगा नल लगभग एक वर्ष से खराब पड़ा है।अब प्रश्न यह उठता है कि आखिरकार रिबोर के नाम पर लाखों रूपए सरकारी खजाने से निकाल लिये जाते हैं फिर गांवों में नल खराब क्यों पड़े हैं ? यह यक्ष प्रश्न अधिकारियों के स्थलीय निरीक्षण का विषय है। इस बाबत जब खंड विकास अधिकारी अरुण कुमार सिंह से जानकारी ली गई तो उन्होंने बताया यदि गांवों में नल खराब हैं और पैसा निकला गया है तो जांच कराई जाएगी। ग्राम पंचायत अधिकारी से पंचायत वार रिबोर नलों की संख्या मांगी जाएगी जांच में अनियमितता मिलने पर कार्यवाही की जायेगी।